ऑनलाइन खरीदारी में फर्जी छूट, भ्रामक सर्च परिणाम और छिपे प्रायोजित विज्ञापनों पर रोक मजबूत होने जा रही है। सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 में संशोधन किया है। नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और ई-कॉमर्स कंपनियों को कीमत, विज्ञापन, शिकायत और विक्रेता की जानकारी अधिक साफ तरीके से दिखानी होगी।
छूट के साथ पुरानी कीमत भी दिखानी होगी
किसी वस्तु या सेवा पर कीमत घटाने की घोषणा करते समय प्लेटफॉर्म को नई कीमत के साथ पुरानी कीमत दिखानी होगी। पुरानी कीमत का अर्थ घोषणा से पहले के 30 दिनों में उस उत्पाद की सबसे कम पेशकश कीमत होगा। इससे पहले कीमत बढ़ाकर बड़ा प्रतिशत डिस्काउंट दिखाने जैसी चालों पर अंकुश लग सकता है और ग्राहक वास्तविक बचत समझ सकेगा।
सर्च परिणाम में हेरफेर नहीं
ई-कॉमर्स कंपनी किसी ग्राहक की खोज के परिणाम इस तरह नहीं बदल सकेगी जिससे वह गुमराह हो या उसकी खोज से जुड़ी वस्तुओं की प्रासंगिकता प्रभावित हो। पैसे लेकर ऊपर दिखाई जाने वाली प्रायोजित लिस्टिंग को साफ और प्रमुख रूप से चिन्हित करना होगा। इससे ग्राहक सामान्य परिणाम और विज्ञापन में अंतर पहचान सकेगा।
डार्क पैटर्न पर सालाना जांच
प्लेटफॉर्म को डार्क पैटर्न रोकने के लिए 2023 में जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। हर साल स्वयं जांच कर अनुपालन प्रमाणपत्र प्रमुख स्थान पर दिखाना होगा। डार्क पैटर्न में ऐसी डिजाइन तरकीबें आती हैं जो ग्राहक को अनचाही खरीद, सदस्यता या भुगतान की ओर धकेलती हैं।
रिफंड, वारंटी और देश की जानकारी
मार्केटप्लेस को उत्पाद की उपयोग अवधि, वापसी और रिफंड नीति, वारंटी, डिलीवरी तथा भुगतान से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। आयातित सामान के लिए आयातक और मूल देश की जानकारी भी दिखानी होगी। ग्राहक की सूचना का निर्दिष्ट कामों में उपयोग करने से पहले स्पष्ट और सकारात्मक सहमति जरूरी होगी।
शिकायत की प्रति ग्राहक को मिलेगी
हर ई-कॉमर्स कंपनी को National Consumer Helpline की समन्वय प्रक्रिया में भागीदार बनना होगा। शिकायत अधिकारी के पास दर्ज शिकायत की प्रति शिकायतकर्ता को देना भी जरूरी होगा। वर्ष 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को कुल 17,71,622 शिकायतें मिली थीं, जिनमें 5,11,196 यानी करीब 29 प्रतिशत ई-कॉमर्स क्षेत्र से जुड़ी थीं।
अलग सेवा का शुल्क जबरन नहीं
मार्केटप्लेस अपने प्लेटफॉर्म से असंबंधित सेवाओं का शुल्क एक साथ जोड़कर नहीं वसूल सकेगा। तय अपवाद के तहत लॉयल्टी या सदस्यता कार्यक्रमों पर अलग व्यवस्था हो सकती है। इससे भुगतान के अंतिम चरण में अचानक जुड़े शुल्कों पर नियंत्रण बढ़ेगा।
ग्राहक अभी से क्या देखें
- छूट प्रतिशत के बजाय अंतिम कीमत की तुलना करें।
- स्पॉन्सर्ड या विज्ञापन लिस्टिंग का निशान देखें।
- रिटर्न, रिफंड, वारंटी और डिलीवरी शर्तें पढ़ें।
- आयातित उत्पाद में मूल देश और आयातक की जानकारी जांचें।
- शिकायत संख्या और दर्ज शिकायत की प्रति सुरक्षित रखें।
नियम लागू होने तक कंपनियों को अपनी वेबसाइट, ऐप, शिकायत व्यवस्था और विक्रेता विवरण में बदलाव करने का समय मिलेगा। ग्राहकों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि ऑनलाइन छूट और खोज परिणामों के पीछे की जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएगी।



