आइजोल: बराक नदी और उसकी सहायक नदियों के कैचमेंट क्षेत्रों के संरक्षण व पुनर्बहाली की परियोजना मिजोरम के आठ जिलों में लागू की जाएगी। परियोजना में जंगल, वन्यजीव और जल संसाधनों की रक्षा के साथ कैचमेंट क्षेत्र के किसानों की आजीविका सुधारने पर काम होगा।
आठ जिले परियोजना में शामिल
परियोजना आइजोल, चम्फाई, मामित, लुंगलेई, सेरछिप, कोलासिब, सैतुअल और खावजॉल जिलों को कवर करेगी। इसकी रूपरेखा पर 10 सितंबर को खावजॉल उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त के. वनलालथियाना ने की।
नॉर्थ ईस्टर्न रीजन कम्युनिटी रिसोर्स मैनेजमेंट सोसाइटी (NERCORMS) के वरिष्ठ प्रबंधक राजखुंगुर बसुमतारी ने प्रस्तावित गतिविधियों की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि परियोजना को भारत सरकार और जर्मनी के विकास बैंक KfW से वित्त मिलेगा। इसे उत्तर पूर्वी परिषद के तहत लागू किया जाएगा और NERCORMS कार्यान्वयन एजेंसी होगी।
बाढ़ और भूस्खलन का जोखिम घटाने का लक्ष्य
बैठक में बताया गया कि अनुचित भूमि उपयोग, कमजोर वाटरशेड प्रबंधन और नदी तंत्र के प्रबंधन में तालमेल की कमी से बाढ़, भूस्खलन और संबंधित समस्याएँ बढ़ी हैं। परियोजना के जरिए जलग्रहण क्षेत्रों की स्थिति सुधारने, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव घटाने और स्थानीय समुदायों को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ने की योजना है।
विभिन्न विभागों को परियोजना के लिए आवश्यक आँकड़े जुटाकर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। NERCORMS की टीम 12 से 16 अक्टूबर 2026 के बीच मिजोरम लौटेगी। इस दौरान खावजॉल जिले में कैचमेंट क्षेत्रों का निरीक्षण और संबंधित सरकारी अधिकारियों के साथ चर्चा प्रस्तावित है।
यह योजना असम, मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड में बराक नदी के कैचमेंट संरक्षण की व्यापक पहल का हिस्सा है। विस्तृत लागत, कार्य-अवधि और जिलेवार भौतिक लक्ष्य अभी सार्वजनिक रिपोर्ट में नहीं दिए गए हैं; ये आगे की सर्वेक्षण और परियोजना योजना के बाद स्पष्ट होंगे।