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लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371(K) का प्रस्ताव, निर्वाचित निकाय की शक्तियों पर बातचीत जारी

लेह, 12 सितंबर 2026। लद्दाख को संवैधानिक और विधायी सुरक्षा देने के लिए केंद्र तथा क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच अनुच्छेद 371 के तहत एक विशेष व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ी है। प्रस्तावित प्रावधान को अभी अनुच्छेद 371(K) के रूप में चर्चा में रखा गया है। हालांकि इसका अंतिम मसौदा तैयार नहीं हुआ है और संसद की मंजूरी सहित कई संवैधानिक चरण बाकी हैं।

दिल्ली की बैठक में क्या चर्चा हुई?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों और लद्दाख की उपसमिति की 9 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक हुई। इसमें लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के प्रतिनिधि शामिल थे। बैठक में लद्दाख के लिए एक सीधे निर्वाचित क्षेत्रीय निकाय बनाने के ढांचे पर चर्चा हुई। प्रशासन के अनुसार प्रतिनिधियों में निर्वाचन क्षेत्रों के माध्यम से सीधे चुनाव कराने पर सहमति बनी है।

प्रस्ताव का उद्देश्य जमीन, संस्कृति, भाषा, वन, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों जैसे स्थानीय विषयों पर संवैधानिक सुरक्षा देना है। इन विषयों में प्रस्तावित निर्वाचित निकाय को कानून बनाने की भूमिका मिल सकती है। किन विषयों पर अंतिम अधिकार होगा, इसका निर्णय मसौदा तैयार होने और आगे की वार्ता के बाद ही स्पष्ट होगा।

राज्य का दर्जा या विधानसभा अभी तय नहीं

लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बताया कि विचाराधीन मॉडल न तो पूर्ण राज्य का दर्जा है और न मौजूदा प्रकार की विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश। इसे लद्दाख की परिस्थितियों के अनुरूप अलग संवैधानिक व्यवस्था के रूप में तैयार किया जाना है। इसके लिए संविधान संशोधन और संसद में आवश्यक बहुमत की जरूरत पड़ेगी।

क्षेत्रीय संगठनों ने प्रस्तावित निकाय के लिए कार्यपालिका, बजट, योजना और वित्तीय अधिकारों की मांग भी रखी है। इन शक्तियों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है। पुलिस और प्रशासनिक नियंत्रण जैसे विषय भी चर्चा में निर्णायक माने जा रहे हैं। इसलिए वर्तमान घटनाक्रम को अंतिम कानूनी फैसला या लागू हो चुका विशेष दर्जा नहीं माना जाना चाहिए।

लद्दाख के लिए इसका महत्व

साल 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद लद्दाख बिना विधानसभा वाला केंद्रशासित प्रदेश बना था। इसके बाद लेह और कारगिल के संगठनों ने भूमि, रोजगार, संस्कृति और पर्यावरण की सुरक्षा के साथ लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की मांग तेज की। अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्ताव इसी लंबे संवाद की नवीनतम कड़ी है।

यदि अंतिम व्यवस्था बनती है तो स्थानीय लोगों को निर्वाचित निकाय के माध्यम से कई क्षेत्रीय विषयों पर भागीदारी मिल सकती है। इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन तभी होगा जब सरकार शक्तियों, वित्तीय व्यवस्था, निर्वाचन प्रणाली और केंद्र के अधिकारों का विस्तृत मसौदा सार्वजनिक करेगी।

आगे क्या होगा?

गृह मंत्रालय, लद्दाख प्रशासन और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच आगे भी बैठकें होंगी। मसौदे पर सहमति के बाद संवैधानिक संशोधन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ने का संकेत मिला है, लेकिन अनुच्छेद 371(K) अभी कानून नहीं बना है। लद्दाख के लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न प्रस्तावित निकाय की वास्तविक विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां रहेंगी।