हनुमान अंश के गीतों के पीछे बड़े रिकॉर्डिंग सेटअप से अलग एक सादा तरीका रहा। संगीतकार धीरेंद्र मुलकलवार ने सीमित संसाधनों के कारण अपने घर को रिकॉर्डिंग की जगह बनाया, जबकि गायक श्रेयस धर्माधिकारी अपने घर के मंदिर के लिए तैयार किए गीत को फिल्म तक लेकर आए। दोनों की भागीदारी से फिल्म का संगीत आकार लेने की कहानी सामने आई है।
घर के लिए लिखा गीत फिल्म में पहुँचा
श्रेयस ने बताया कि उन्होंने “जय हनुमान” मूल रूप से ग्वालियर स्थित अपने घर के मंदिर के लिए बनाया था। एक इस्कॉन कार्यक्रम में फिल्मकार विशाल चतुर्वेदी से उनकी मुलाकात हुई। इसके बाद गीत को फिल्म में इस्तेमाल करने की बात आगे बढ़ी। फिल्म के लिए रिकॉर्डिंग करते समय निर्देशक ने गीत की सहज और अपेक्षाकृत कच्ची प्रस्तुति बनाए रखने को कहा, ताकि उसका भाव बना रहे।
श्रेयस के मुताबिक, उन्होंने अपने लिए शुल्क नहीं लिया। सहयोगी संगीतकारों का खर्च निकल सके, इसलिए केवल न्यूनतम रकम स्वीकार की। यह उनका बताया हुआ निजी निर्णय था; इसे फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों की भुगतान व्यवस्था के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
घर बना रिकॉर्डिंग स्टूडियो
धीरेंद्र मुलकलवार ने “सियावर रामचंद्र की जय” गाने के साथ फिल्म का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर तैयार किया। उन्होंने बताया कि बजट की सीमा के बीच दोस्तों ने सहयोग किया और घर में ही रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की गई। इस तरह तैयार संगीत में बड़े स्टूडियो के बजाय कलाकारों के आपसी तालमेल की प्रमुख भूमिका रही।
धीरेंद्र के लिए यह फिल्म व्यक्तिगत रूप से भी खास रही। उनके अनुसार, वे पिछले वर्ष अप्रैल में कैंची धाम गए थे और लगभग दो महीने बाद इस परियोजना का प्रस्ताव मिला। उन्होंने इसे अपने अनुभव के रूप में साझा किया है; फिल्म की व्यावसायिक सफलता या घटनाओं के बीच किसी अलौकिक संबंध का प्रमाण इससे नहीं निकलता। लंबे समय तक फिल्म-संगीत के काम से जुड़े रहने के बाद उन्हें इस परियोजना में स्वतंत्र संगीतकार के रूप में प्रमुख जिम्मेदारी मिली।
फिल्म के गीतों पर चर्चा के बीच संगीतकारों की यह कहानी दिखाती है कि कम बजट में भी स्पष्ट रचनात्मक सोच और सहयोग से अलग पहचान वाला साउंडट्रैक तैयार किया जा सकता है।
