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वाराणसी में चुने किसानों को तोरिया बीज, खाली खेतों में छोटी अवधि की फसल का विकल्प

तोरिया बीज को बोने से पहले देखते किसान का सांकेतिक दृश्य

वाराणसी, 12 सितंबर 2026। जिले के चांदपुर स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर के सरकारी बीज भंडार में शुक्रवार को ई-लॉटरी से चुने गए किसानों को तोरिया (लाही) बीज की मुफ्त मिनीकिट दी गई। वाराणसी मंडल के संयुक्त कृषि निदेशक शैलेंद्र कुमार ने वितरण कार्यक्रम में किसानों से इस तिलहन फसल को खाली पड़े खेतों में आजमाने की बात कही। उपलब्ध जानकारी में मिनीकिट की कुल संख्या या हर किसान को मिली बीज मात्रा नहीं बताई गई है।

रबी की बुवाई से पहले फसल का अवसर

कृषि अधिकारियों के अनुसार तोरिया की फसल सामान्यतः लगभग 90 से 95 दिन में तैयार हो सकती है। खेत और मौसम की स्थिति अनुकूल रहे तो कटाई के बाद उसी जमीन पर गेहूं या दूसरी रबी फसल लेने की योजना बनाई जा सकती है। इसे अतिरिक्त आमदनी की संभावना के रूप में बताया गया है, तय उत्पादन या कमाई की गारंटी के रूप में नहीं। किसान अपनी जमीन की नमी, पानी की उपलब्धता और अगली फसल की बुवाई का समय देखकर निर्णय लें।

कार्यक्रम में अधिकारियों ने 15 सितंबर से अक्टूबर के मध्य तक तोरिया बुवाई का समय बताया। हल्की या बलुई दोमट मिट्टी और खेत से पानी निकलने की व्यवस्था पर जोर दिया गया। भारी बारिश में पानी ठहरने से शुरुआती फसल को नुकसान हो सकता है, इसलिए स्थानीय मौसम चेतावनी और कृषि अधिकारी की सलाह के आधार पर बुवाई का दिन चुनना बेहतर होगा।

बीज बुकिंग और पंजीकरण की जानकारी

मिनीकिट पाने वाले किसानों का चयन ई-लॉटरी से हुआ था। आयोजन में दूसरी रबी फसलों के बीज के लिए ऑनलाइन बुकिंग कराने और किसान पंजीकरण पूरा रखने की सलाह भी दी गई। बीज भंडार प्रभारी राहुल राज तथा कृषि विभाग के अन्य कर्मचारी कार्यक्रम में मौजूद थे। नवीन कुमार, छोटेलाल और छविनाथ सहित चयनित किसान भी पहुंचे। जिन किसानों को इस चरण में किट नहीं मिली है, वे अगले वितरण या बीज उपलब्धता की पुष्टि अपने सरकारी बीज भंडार या ब्लॉक कृषि कार्यालय से करें; इस आयोजन की खबर से सभी किसानों के लिए खुला आवेदन मान लेना सही नहीं होगा।

बुवाई से पहले उत्तर प्रदेश का ताजा मौसम संकेत देखें और अधिक विशिष्ट निर्णय के लिए जिला चेतावनी को प्राथमिकता दें।