हरियाणा के नूंह जिले के रहपुआ गाँव में जुलाई में बोई गई अगेती मूली सितंबर में बाजार भेजने के लिए तैयार हो रही है। किसान रुजदार के मुताबिक, इस फसल की बिक्री के बाद वह पत्ते वाली मूली की दूसरी फसल लगाएँगे। उनकी योजना दूसरी उपज को नवंबर और दिसंबर में बेचने की है।
बुवाई और बाजार का समय
रुजदार ने बताया कि वह कई वर्षों से मूली उगा रहे हैं। जुलाई की बुवाई से सितंबर में उपज मिलने लगती है और बिक्री अक्टूबर तक चल सकती है। वह उपज को फरीदाबाद और दिल्ली की ओखला मंडी तक ले जाते हैं। किसान के अनुसार, साफ और अच्छी गुणवत्ता की मूली को इस समय लगभग ₹30–40 प्रति किलोग्राम भाव मिल रहा है। यह उनके अनुभव का भाव है; हर दिन और हर मंडी में एक समान कीमत की गारंटी नहीं है।
आमदनी के दावों में लागत का फर्क
किसान रुजदार का कहना है कि मौसम अनुकूल रहने और फसल को नुकसान न होने पर एक एकड़ मूली से लगभग ₹1.25–1.50 लाख की बचत हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिवार टमाटर, करेला, हरी मिर्च और शिमला मिर्च उगाने में साथ काम करता है। यह बचत उनके खेत और विपणन अनुभव का अनुमान है, सभी किसानों के लिए निश्चित लाभ नहीं।
जिला बागवानी अधिकारी अब्दुल रज्जाक के अनुसार, रहपुआ में किसानों ने करीब 50 एकड़ में अगेती मूली लगाई है। उन्होंने प्रति एकड़ ₹2 लाख से अधिक आमदनी की बात कही। आमदनी और बचत अलग आँकड़े हैं; कुल लागत घटाने पर वास्तविक शुद्ध कमाई बदल सकती है। अधिकारी ने किसानों को विभाग की तकनीकी सलाह और उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लेने को कहा।
अगेती फसल में मौसम, उपज की गुणवत्ता, मंडी तक परिवहन और बिक्री के दिन का भाव नतीजे बदल सकते हैं। नूंह का यह उदाहरण किसान के बताए फसल चक्र और बाजार पहुँच को दिखाता है, किसी तय मुनाफे का वादा नहीं। हरियाणा के किसानों के लिए करनाल बागवानी एक्सपो में भी पौध सामग्री और तकनीक की जानकारी मिलने वाली है।


