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ओडिशा हाई कोर्ट: थैलेसीमिया को दिव्यांगता आकलन से बाहर नहीं रख सकते, NEET अभ्यर्थी की फिर जाँच

कटक, 13 सितंबर: ओडिशा हाई कोर्ट ने NEET-2026 की एक अभ्यर्थी के दिव्यांगता कोटा दावे पर मेडिकल बोर्ड का निष्कर्ष और उसे अस्वीकार करने वाला 25 अगस्त का नोटिस रद्द कर दिया है। अदालत ने चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय को नया मेडिकल बोर्ड गठित कर अभ्यर्थी की दिव्यांगता का प्रतिशत फिर से निर्धारित करने को कहा है। काउंसलिंग जारी होने के कारण यह काम चार दिन में पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

अभ्यर्थी हरप्रिया दास ने 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता दर्शाने वाले सक्षम प्राधिकारी के प्रमाणपत्र के आधार पर आवेदन किया था। बाद में मेडिकल आकलन बोर्ड ने थैलेसीमिया ट्रेट को बिना लक्षण वाला वाहक स्तर बताते हुए कार्यात्मक दिव्यांगता नहीं मानी और पात्रता से इनकार किया। अदालत ने पाया कि बोर्ड ने रक्त विकार के लिए निर्धारित श्रेणी को सही तरह जाँचने के बजाय कार्यात्मक या चलने-फिरने संबंधी मानदंड पर अपना निष्कर्ष केंद्रित किया।

फिर आकलन का आदेश, कोटा की पात्रता का अंतिम फैसला नहीं

मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दाश की पीठ ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची में थैलेसीमिया को निर्दिष्ट रक्त विकारों में रखा गया है। इसलिए केवल एक अलग दिव्यांगता श्रेणी के मानदंड लगाकर दावे को नहीं नकारा जा सकता। अदालत ने अभ्यर्थी को सीधे आरक्षण के लिए पात्र घोषित नहीं किया है; नए बोर्ड को रोग और लागू मानदंड के अनुसार प्रतिशत निर्धारित करना होगा। अंतिम पात्रता उसी निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

यह आदेश संबंधित अभ्यर्थी के मामले में पुनर्मूल्यांकन से जुड़ा है। दूसरे उम्मीदवार अपनी परिस्थिति के लिए आधिकारिक मेडिकल बोर्ड और प्रवेश प्राधिकरण के नियम देखें।