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मुजफ्फरपुर से कई राज्यों तक फल पौधों की आपूर्ति, अनिल का टिशू कल्चर मॉडल

नर्सरी में फलदार पौधों की कतार का सांकेतिक दृश्य

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के शिरकोहिया गांव के अनिल कुमार ने नौकरी छोड़कर फलदार पौधों की नर्सरी को अपना काम बनाया है। रसायन विज्ञान में स्नातकोत्तर अनिल टिशू कल्चर और पौध उत्पादन के माध्यम से किसानों को अंजीर, बिना बीज वाले नींबू, अनार और एवोकाडो जैसे फल लगाने के विकल्प दे रहे हैं। इस पहल का मुख्य सवाल पौधे की उपलब्धता के साथ स्थानीय जलवायु, मिट्टी और बाजार के अनुरूप सही चुनाव भी है।

बाग लगाने से पहले परीक्षण पर जोर

अनिल के अनुसार वह नई किस्मों को किसानों तक पहुंचाने से पहले अपने खेत में आजमाते हैं। उनका दावा है कि उनके नेटवर्क से लगभग पांच हजार किसान जुड़े हैं और राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र तथा कर्नाटक तक पौधे भेजे गए हैं। यह संख्या उनका अपना बयान है; स्वतंत्र आधिकारिक गणना उपलब्ध नहीं है।

अनिल अंजीर की खेती को संभावनाशील बताते हैं। उनके बताए मॉडल में एक एकड़ में लगभग 440 पौधे लग सकते हैं, छह महीने में फल आना शुरू हो सकता है और पूरी उत्पादकता में करीब दो वर्ष लगते हैं। वह प्रति पेड़ लगभग 30 किलो फल और करीब 25 वर्ष की उत्पादक अवधि का अनुमान देते हैं। वास्तविक उपज किस्म, पानी, रोग प्रबंधन, मौसम और देखभाल पर निर्भर करेगी; इन आंकड़ों को हर खेत की निश्चित कमाई नहीं समझना चाहिए।

बाजार व्यवस्था अभी विकास के चरण में

अनिल के मुताबिक उत्पाद की खरीद और विपणन में किसानों की मदद के लिए व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसलिए इसे अभी सुनिश्चित खरीद की गारंटी कहना जल्दबाजी होगी। किसान पौधे लेते समय प्रमाणित गुणवत्ता, उपयुक्त जलवायु, पानी की जरूरत और स्थानीय बाजार का आकलन करें। उनके अनुभव से उन्नत बागवानी की एक राह दिखती है, लेकिन निवेश का निर्णय अपने खेत की परिस्थितियों के आधार पर ही करना उचित होगा।