राष्ट्रीय राजमार्ग पर मदद मांगने वाले की जगह पहचानने और उसके पास उपयुक्त सहायता वाहन भेजने के लिए 1033 हेल्पलाइन को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी है। एनएचएआई की इस योजना में अलग-अलग भारतीय भाषाओं में कॉल समझने और आपात सेवाओं के बीच समन्वय सुधारने पर जोर है।
अभी योजना और तकनीकी सुझावों का चरण
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 14 सितंबर को बताया कि आईएचएमसीएल ने नई प्रणाली विकसित करने, तैनात करने और चलाने के लिए कंपनियों तथा समूहों से रुचि की अभिव्यक्ति मांगी है। उद्योग के सुझावों से अंतिम जरूरतें तय होंगी। नई सुविधाओं के देशभर में लागू हो जाने की घोषणा नहीं हुई है।
प्रस्ताव में वास्तविक समय की लोकेशन, बहुभाषी कॉल पहचान और सही एम्बुलेंस, क्रेन या गश्ती वाहन चुनने वाली व्यवस्था शामिल है। घटनाओं की समय पर सूचना देना भी लक्ष्य है। आपात मामलों में मानवीय निर्णय के लिए ऑपरेटरों की भूमिका बनी रहेगी।
मौजूदा सेवा किस काम आती है?
1033 सेवा चौबीसों घंटे उपलब्ध है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर चिकित्सा आपातस्थिति, वाहन खराब होने, सहायता वाहन की जरूरत और टोल या फास्टैग संबंधी दिक्कतों के लिए इसका उपयोग किया जाता है। प्रस्तावित बदलाव इसी मौजूदा सेवा को बेहतर बनाने के लिए हैं।
