ग्रामीण परिवारों तक पेंशन संबंधी जानकारी और नामांकन में सहायता पहुँचाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग तथा पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने समझौता किया है। मंत्रालय की 15 सितंबर को जारी जानकारी के अनुसार, इस पहल में महिला स्वयं सहायता समूहों और प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं के नेटवर्क का इस्तेमाल होगा।
जानकारी से लेकर नामांकन के बाद तक सहायता
पेंशन सखियों की भूमिका परिवारों को सेवानिवृत्ति की योजना समझाने, पेंशन सेवाओं की जानकारी देने और नामांकन प्रक्रिया में सहयोग करने की होगी। पंजीकरण के बाद भी सहायता देने का उद्देश्य रखा गया है। स्वयं सहायता समूह की सदस्य, ग्रामीण महिलाएँ और लखपति दीदियाँ इस संपर्क अभियान के प्रमुख समूहों में शामिल हैं।
दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बैंकिंग संवाददाता सखियों तथा अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों का सहयोग लिया जाएगा। यह घोषणा पेंशन जागरूकता और सेवाओं तक पहुँच बढ़ाने की है; इसमें प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कोई निश्चित नई पेंशन राशि देने की घोषणा नहीं की गई है।
पारदर्शी जानकारी और निगरानी पर जोर
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने परिवारों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने पर बल दिया, ताकि वे अपनी दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा के बारे में सोच-समझकर निर्णय ले सकें। पहल में राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली सहित पेंशन उत्पादों की समझ बढ़ाने की संभावना बताई गई है।
संपर्क अभियान और नामांकन की प्रगति देखने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, मोबाइल तथा वेब आधारित प्रणालियों का उपयोग प्रस्तावित है। विभाग की लोकोस प्रणाली भी इसमें शामिल है। इससे कवरेज में कमी वाले क्षेत्रों की पहचान में मदद मिलने की अपेक्षा है। समझौता होने और सभी गाँवों में व्यवस्था उपलब्ध हो जाने को एक ही स्थिति नहीं माना जा सकता।

