केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य निधि कवरेज से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने EPFO के तहत अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह बदलाव उन कर्मचारियों और प्रतिष्ठानों के लिए अहम है, जो अब तक मौजूदा सीमा के कारण अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा दायरे से बाहर रह जाते थे।
कितने कर्मचारियों पर असर पड़ेगा
सरकारी अनुमान के अनुसार इस फैसले से करीब 7.98 करोड़ योगदान करने वाले सदस्यों और लगभग 7.68 लाख योगदानकारी प्रतिष्ठानों पर असर पड़ेगा। कर्मचारी भविष्य निधि के तहत बचत, कर्मचारी पेंशन योजना के तहत पेंशन सुरक्षा और कर्मचारी जमा-लिंक्ड बीमा योजना के तहत बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।
मौजूदा EPF वेतन सीमा सितंबर 2014 से ₹15,000 प्रति माह थी। उससे पहले यह सीमा 2004 से 2014 तक बिना बदलाव के रही थी। नई सीमा तय करने से पहले प्रस्ताव पर अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श हुआ और 16 जून 2026 को व्यय वित्त समिति ने इसकी सिफारिश की थी।
सरकारी खर्च और योगदान में बदलाव
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुमान के अनुसार इस बदलाव से सरकार का सालाना खर्च लगभग ₹11,339 करोड़ हो सकता है। अभी बजटीय सहायता करीब ₹10,250 करोड़ के आसपास है। पांच साल में अनुमानित व्यय लगभग ₹56,696 करोड़ बताया गया है।
कर्मचारी और नियोक्ता के योगदान की गणना सीमा बढ़ने के बाद नए वेतन आधार पर हो सकती है। इसका अर्थ है कि पात्र कर्मचारियों के लिए मासिक PF योगदान बढ़ सकता है। कुछ कर्मचारियों की हाथ में आने वाली तनख्वाह थोड़ी घट सकती है, लेकिन उनकी सेवानिवृत्ति बचत और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।
पेंशन और बीमा सुरक्षा का असर
EPS के तहत अभी करीब 82 लाख पेंशनभोगी लाभ ले रहे हैं। वेतन सीमा बढ़ने से भविष्य में pensionable salary का आधार मजबूत हो सकता है। इससे उन कर्मचारियों को लंबे समय में फायदा मिल सकता है, जिनकी आय पहले ₹15,000 से ऊपर थी लेकिन अनिवार्य कवरेज सीमित था।
EDLI बीमा सुरक्षा भी EPF सदस्यता से जुड़ी होती है। इसलिए नए कवरेज के साथ परिवारों के लिए आकस्मिक जोखिम सुरक्षा का दायरा भी बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक लाभ सदस्यता अवधि, योगदान और लागू योजना नियमों पर निर्भर करेगा।
कर्मचारियों और कंपनियों के लिए क्या मायने
यह फैसला सामाजिक सुरक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। संगठित क्षेत्र में काम करने वाले ऐसे कर्मचारी, जिनका वेतन पुराने threshold से थोड़ा ऊपर था, अब ज्यादा व्यवस्थित retirement savings framework में आ सकते हैं। कंपनियों के लिए payroll cost बढ़ने की संभावना रहेगी, क्योंकि नियोक्ता योगदान भी बढ़ सकता है।
छोटे और मध्यम प्रतिष्ठानों को नए नियमों के हिसाब से payroll, compliance और employee communication में बदलाव करना होगा। कर्मचारियों के लिए जरूरी होगा कि वे अपनी salary slip, EPF passbook और pension eligibility की जानकारी नियमित रूप से जांचें, ताकि contribution और benefits को लेकर भ्रम न रहे।
