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सिक्किम हाईकोर्ट ने जलवायु आपदा तैयारी पर स्वतः संज्ञान PIL बढ़ाई, रेलवे और NHIDCL भी पक्षकार

देश की आवाज़ न्यूज डेस्क | गंगटोक, 19 सितंबर 2026। सिक्किम हाईकोर्ट ने जलवायु से जुड़ी आपदाओं के प्रति राज्य की तैयारी की जाँच के लिए स्वतः संज्ञान जनहित याचिका का दायरा बढ़ाया है। हाल की नेपाल-तिब्बत बाढ़ और सिक्किम के अपने भूस्खलन व बाढ़ अनुभवों को देखते हुए अदालत ने रेलवे मंत्रालय और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम (NHIDCL) समेत अतिरिक्त प्राधिकरणों को पक्षकार बनाया है।

मुख्य न्यायाधीश ए. मुहम्मद मुस्ताक ने आपदा प्रबंधन को घटना के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित रखने के बजाय पूर्वानुमान, रोकथाम और समुदाय की भागीदारी पर आधारित बनाने की जरूरत रेखांकित की। अदालत ने 2023 की विनाशकारी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का संदर्भ भी लिया, जिसने तीस्ता घाटी में व्यापक नुकसान किया था।

मामले में नदियों के किनारे बुनियादी ढाँचे, सड़क और रेल परियोजनाओं, चेतावनी तंत्र, निकासी योजना तथा विभिन्न एजेंसियों के समन्वय की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी। अतिरिक्त पक्षकार बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने किसी विभाग की लापरवाही तय कर दी है; फिलहाल उद्देश्य तैयारियों और जोखिम घटाने की व्यवस्था का संस्थागत परीक्षण है।

सिक्किम में लगातार बारिश, भूस्खलन और नदी घाटी के जोखिम को देखते हुए जनहित याचिका का असर भविष्य की परियोजना योजना और आपदा प्रतिक्रिया मानकों पर पड़ सकता है। आगे के निर्देश अदालत के लिखित आदेश और पक्षकारों के जवाब पर निर्भर होंगे।