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कल्पसर परियोजना में डच विशेषज्ञता का सहयोग, भारत–नीदरलैंड के बीच दो समझौते

जल प्रबंधन के लिए तटीय तटबंध और जलाशय का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

गुजरात की कल्पसर परियोजना के लिए तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से भारत तथा नीदरलैंड के संस्थानों के बीच दो त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 9वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय जल सप्ताह के दौरान दोनों देशों ने जल क्षेत्र की साझेदारी की समीक्षा की।

24 सितंबर को जारी जल शक्ति मंत्रालय के विवरण के अनुसार, समझौतों में केंद्रीय जल आयोग, गुजरात सरकार का कल्पसर विभाग और नीदरलैंड के ज्ञान संस्थान डेल्टारेस तथा टीयू डेल्फ्ट शामिल हैं। सहयोग का केंद्र परियोजना की योजना, डिजाइन और क्रियान्वयन के लिए तकनीकी अनुभव साझा करना है।

जलाशय की योजना में किन नदियों का पानी

बैठक की अध्यक्षता जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और नीदरलैंड के अवसंरचना व जल प्रबंधन उप-मंत्री जाप स्लूटमेकर ने की। पाटिल ने बताया कि कल्पसर में साबरमती, माही और धाधर नदियों के अपवाह तथा नर्मदा से लाए जाने वाले पानी को मिलाकर मीठे पानी का जलाशय बनाने की परिकल्पना है।

मंत्री के अनुसार, मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान भी परियोजना पर चर्चा हुई थी। तकनीकी सहयोग के लिए 16 मई को आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए थे। अब हुए समझौते उसी सहयोग को आगे ले जाने का कदम हैं।

बाढ़ सुरक्षा से डिजिटल मॉडलिंग तक सहयोग

डेल्टारेस के साथ सहयोग में तकनीकी समीक्षा, पानी के प्रवाह और उपलब्धता की मॉडलिंग, तटीय व संरचनात्मक इंजीनियरिंग, जलवायु अनुकूलन, प्रशिक्षण तथा डिजिटल अनुप्रयोग शामिल हैं। जुलाई में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की नीदरलैंड यात्रा के दौरान बाढ़ सुरक्षा, पंपिंग सिस्टम और तटबंधों से जुड़े अनुभवों पर भी जानकारी ली गई थी।

डच पक्ष ने अपने लगभग सौ साल पुराने अफस्लुइटडिज्क बाँध और उसके नवीनीकरण का अनुभव साझा करने की बात कही। स्लूटमेकर ने पारिस्थितिकी तथा मछलियों के प्रवास से जुड़ी सीख के आदान-प्रदान को भी महत्त्व दिया।

ये समझौते तकनीकी सहयोग से संबंधित हैं। मंत्रालय की इस घोषणा में कल्पसर परियोजना के निर्माण के पूरा होने या उसके संचालन शुरू होने की जानकारी नहीं दी गई है।