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NHAI की नई गाइडलाइन: हाई-स्पीड कॉरिडोर में बेहतर जल निकासी और फ्री-फ्लो टोल पर जोर

हरियाली, जल निकासी और टोल सेंसर वाले राजमार्ग का सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने आगामी हाई-स्पीड राष्ट्रीय राजमार्गों की योजना और डिजाइन के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें यातायात के अनुमान, निर्माण की निगरानी, बिना रुकावट टोल व्यवस्था की तैयारी, पौधारोपण और बारिश के पानी की निकासी को परियोजना की शुरुआत से शामिल करने पर जोर है।

किन राजमार्गों पर लागू होगी नई व्यवस्था

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, दिशानिर्देश एक्सप्रेसवे के अलावा आगामी चार और छह लेन वाले नियंत्रित प्रवेश राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए हैं। इनके दायरे में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड, दोनों तरह की परियोजनाएं आएंगी। लक्ष्य है कि डिजाइन बनाते समय सुरक्षा के साथ भविष्य में बढ़ने वाले यातायात की जरूरतों का भी आकलन हो।

इस घोषणा को देश के सभी मौजूदा राजमार्गों पर तत्काल नई व्यवस्था लागू होने या सभी सड़कों के एक साथ चौड़ीकरण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्रालय ने इसे संबंधित आगामी परियोजनाओं की योजना और डिजाइन के दिशानिर्देश बताया है।

यातायात का अनुमान लगाने में टोल आंकड़ों का उपयोग

किसी कॉरिडोर पर वाहनों की भविष्य की संख्या का अनुमान केवल वर्तमान यातायात के आधार पर नहीं लगाया जाएगा। आसपास के वैकल्पिक रास्तों से आने वाले वाहनों तथा आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण माल ढुलाई में संभावित बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखा जाएगा।

इसके लिए टोल के आंकड़ों और अन्य भरोसेमंद सूचनाओं का इस्तेमाल होगा। इससे सड़क की क्षमता और उससे जुड़ी सुविधाओं की जरूरत का आकलन अधिक ठोस आधार पर करने का प्रयास है।

मशीनों से निर्माण और टोल तकनीक की तैयारी

निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी सुधारने के लिए स्वचालित तथा इंटेलिजेंट मशीन-सहायता प्राप्त निर्माण तकनीक का प्रावधान है। मंत्रालय के लागू निर्देशों के अनुसार इसका उपयोग तटबंध और सड़क की संरचनात्मक परतों के निर्माण में किया जाएगा।

कॉरिडोर को मल्टी लेन फ्री फ्लो यानी MLFF टोल प्रणाली की ओर ले जाने के लिए जरूरी प्रावधान भी डिजाइन में किए जाएंगे। घोषणा में किसी खास मार्ग पर इस प्रणाली के शुरू होने की तारीख नहीं दी गई है। इसलिए यह टोल शुल्क समाप्त करने अथवा सभी टोल प्लाजा तुरंत हटाने की घोषणा नहीं है।

जलभराव रोकने की योजना DPR का हिस्सा

विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि बारिश का पानी कहां निकलेगा और सड़क के साथ आसपास के इलाके से आने वाले पानी का प्रबंधन कैसे होगा। अंडरपास, फ्लाईओवर, नीचे स्थित डिवाइडर और अन्य संरचनाओं के पास विशेष इंतजाम किए जाएंगे।

जहां प्राकृतिक निकासी उपलब्ध नहीं है, वहां उपयुक्त स्थानों और लूप क्षेत्रों में जल संचयन संरचनाओं का प्रावधान होगा। इससे जलभराव और सड़क ढांचे को होने वाले नुकसान को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

हरियाली के साथ पानी की बचत पर ध्यान

पौधारोपण और आसपास के भू-दृश्य का विकास बाद में जोड़ा जाने वाला काम नहीं रहेगा; इसे योजना में ही शामिल किया जाएगा। स्थानीय मौसम, जमीन की बनावट और पर्यावरण के अनुसार डिवाइडर, फ्लाईओवर के नीचे तथा अन्य उपयुक्त जगहों पर पौधे लगाने की योजना बनेगी।

डिवाइडर के पौधों के लिए टपक सिंचाई का प्रावधान रखा गया है। इन उपायों का वास्तविक लाभ संबंधित परियोजनाओं में डिजाइन के क्रियान्वयन, निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर निर्भर करेगा।