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Omaxe पर SEBI की तीन महीने की रोक, सार्वजनिक हिस्सेदारी मामले में छह पक्षों पर जुर्माना

Omaxe मामले की खबर के लिए रियल एस्टेट और बाजार नियमन का सांकेतिक चित्र

Omaxe और पांच अन्य पक्षों के खिलाफ न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी से जुड़े मामले में SEBI ने बाजार प्रतिबंध और कुल ₹1.92 करोड़ का जुर्माना लगाया है। 24 सितंबर 2026 के आदेश में कंपनी को तीन महीने के लिए प्रतिभूति बाजार तक पहुंच और प्रतिभूतियों में लेनदेन से रोका गया है। अन्य पांच पक्षों के लिए यह अवधि एक साल है।

आदेश में रोक संबंधित पक्षों पर लगाई गई है। इसे अपने आप सभी सामान्य निवेशकों के लिए कंपनी के शेयरों का कारोबार बंद होने का आदेश समझना सही नहीं होगा। मामला 2013 की शेयर बिक्री, उसके लिए इस्तेमाल हुई रकम और उन शेयरों को सार्वजनिक हिस्सेदारी में गिनने से जुड़ा है।

Omaxe और अन्य पक्षों पर कितनी कार्रवाई?

SEBI के निर्देशों के अनुसार, रोक आदेश की तारीख से लागू है। इसके दायरे में सीधे या परोक्ष रूप से प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री, म्यूचुअल फंड यूनिट्स में लेनदेन और किसी भी तरह प्रतिभूति बाजार से जुड़ना शामिल है। अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत लगाए जुर्मानों को जोड़ने पर पक्षवार रकम इस प्रकार है:

पक्ष रोक की अवधि कुल जुर्माना
Omaxe Limited तीन महीने ₹27 लाख
रोहतास गोयल एक साल ₹37 लाख
सुनील गोयल एक साल ₹37 लाख
जय भगवान गोयल एक साल ₹37 लाख
Dream Home Developers एक साल ₹27 लाख
Guild Builders एक साल ₹27 लाख

जुर्माना आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश है। पहले से खुले एक्सचेंज डेरिवेटिव सौदों को बंद करने के लिए तीन महीने या अनुबंध की समाप्ति, जो पहले हो, तक की सीमित छूट दी गई है। आदेश की तारीख को कारोबार बंद होने से पहले हुए लेनदेन के भुगतान और डिलीवरी दायित्व निपटाने की अनुमति भी है।

₹46.50 करोड़ के फंड प्रवाह पर क्या निष्कर्ष निकला?

नियामक ने पाया कि कंपनी से निकली रकम विभिन्न इकाइयों के रास्ते उन खातों तक पहुंची, जिनसे 3 जून और 29 अक्टूबर 2013 के ऑफर फॉर सेल में Omaxe के शेयर खरीदे गए। आदेश में ₹46.50 करोड़ के फंड प्रवाह और 12 इकाइयों द्वारा खरीदे गए 33,42,310 शेयरों का विश्लेषण किया गया है।

SEBI के निष्कर्ष के मुताबिक, इस व्यवस्था से खरीदे शेयरों को स्वतंत्र सार्वजनिक हिस्सेदारी नहीं माना जा सकता। संबंधित शेयर और बाद में मिले बोनस शेयर हटाने पर उस समय दिखाई गई 25.01% सार्वजनिक हिस्सेदारी लगभग 22.71% रह जाती है। नियामक ने इसी आधार पर निर्धारित 25% हिस्सेदारी नियम का पालन न होने का निष्कर्ष दिया। ये ऐतिहासिक लेनदेन से जुड़े आंकड़े हैं, वर्तमान शेयरहोल्डिंग का विवरण नहीं।

दो अन्य पक्षों के विरुद्ध साक्ष्य पर्याप्त नहीं

आदेश में सुषमा गोयल और सीमा गोयल की भूमिका अलग से जांची गई। SEBI ने कहा कि संबंधित फंड प्रवाह या दोनों ऑफर फॉर सेल में उनकी विशिष्ट भागीदारी स्थापित करने के लिए पर्याप्त सामग्री नहीं मिली। केवल प्रमोटर समूह का सदस्य होने और समूह को लाभ पहुंचने से हर सदस्य की व्यक्तिगत भागीदारी सिद्ध नहीं होती।

नियामक ने यह भी दर्ज किया कि किसी खास निवेशक का सीधे मापने योग्य नुकसान उपलब्ध रिकॉर्ड से निर्धारित नहीं हुआ। हालांकि उसके अनुसार गलत हिस्सेदारी विवरण ने निवेशकों को कंपनी के स्वामित्व और नियम पालन की सही जानकारी से वंचित किया। इस कार्रवाई की अवधि और दायरा समझते समय आदेश में दिए निष्कर्ष, छूट और प्रत्येक पक्ष की अलग स्थिति को साथ पढ़ना जरूरी है।