पूरा भारत · हिन्दी
▤   पूरा भारतदेश की आवाज़पूरी तस्वीरराष्ट्रीय संस्करण
⌖ पूरा भारत

गिग कामगारों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड अधिसूचित, साल में कम से कम तीन बैठकें

कामगारों की सामाजिक सुरक्षा पर नीतिगत चर्चा का सांकेतिक चित्र

सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की संरचना केंद्र सरकार ने असंगठित कामगारों के साथ गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए अधिसूचित की है। यह कदम उन श्रमिकों के लिए नीति-निर्माण का औपचारिक मंच बनाता है जिनका काम ऐप-आधारित डिलीवरी, कैब सेवा और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्मों से जुड़ा है। बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। इसमें केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधि, एग्रीगेटर कंपनियां, नियोक्ता, नागरिक समाज, श्रमिक संघ तथा गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के संगठन शामिल होंगे।

बोर्ड के जिम्मे क्या होगा

बोर्ड अलग-अलग श्रेणियों के असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश केंद्र सरकार को करेगा। उसे सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन से जुड़े ऐसे विषयों पर सलाह देने की जिम्मेदारी भी दी गई है जिन्हें सरकार उसके सामने रखेगी। इसके अलावा, केंद्र द्वारा चलाई जा रही कल्याण योजनाओं की निगरानी करना, राज्यों में कामगारों के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था की समीक्षा करना और संबंधित निधि तथा खातों से हुए खर्च को देखना भी उसके कार्यों में शामिल है। सरकार आवश्यकता पड़ने पर उसे अतिरिक्त जिम्मेदारियां दे सकती है।

बोर्ड की साल में कम से कम तीन बैठकें होंगी। इस व्यवस्था का व्यावहारिक महत्व इस बात पर निर्भर करेगा कि बैठकें कितनी नियमित होती हैं, कामगारों और कंपनियों के प्रतिनिधियों की भागीदारी कितनी सार्थक रहती है और सिफारिशों को योजनाओं में बदलने की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट बनाई जाती है। केंद्र और राज्यों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से नीति और उसके जमीनी क्रियान्वयन के बीच संवाद का रास्ता खुल सकता है, हालांकि अधिसूचना अपने आप किसी राज्य में नई सुविधा लागू नहीं करती।

अधिसूचना और लाभ में फर्क

इस घोषणा को किसी नए बीमा, पेंशन या नकद भुगतान की शुरुआत समझना ठीक नहीं होगा। मौजूदा सूचना बोर्ड की संरचना और काम तय करती है; इसमें किसी नई योजना की पात्रता, लाभ की रकम, पंजीकरण की अंतिम तारीख या भुगतान शुरू होने का कार्यक्रम नहीं दिया गया है। ऐसी जानकारियां तभी स्पष्ट होंगी जब संबंधित योजना, उसके नियम और कार्यान्वयन का तरीका अलग से सामने आएगा। कामगारों को किसी अनधिकृत व्यक्ति को शुल्क देने या निजी जानकारी साझा करने से पहले आधिकारिक निर्देश की पुष्टि करनी चाहिए।

राष्ट्रीय स्तर पर बना यह मंच असंगठित और प्लेटफॉर्म आधारित काम के लिए योजनाओं की समीक्षा और सुझावों को संस्थागत रूप दे सकता है। इससे आगे की प्रगति का आकलन बोर्ड की बैठकों, सरकार की स्वीकार की गई सिफारिशों और घोषित योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन से होगा। इसलिए फिलहाल सबसे ठोस बदलाव एक नियमित निर्णयकारी मंच का गठन है; कामगारों के लिए प्रत्यक्ष लाभ की शर्तें इस अधिसूचना से तय नहीं होतीं।

आगे किन बातों पर नजर रहेगी

कामगारों के लिए बोर्ड की उपयोगिता केवल प्रतिनिधियों की सूची से नहीं, बल्कि उसके काम की निरंतरता से तय होगी। उसकी बैठकों में कौन-से मुद्दे रखे जाते हैं, योजनाओं की सिफारिश पर सरकार क्या निर्णय लेती है और राज्यों के रिकॉर्ड की समीक्षा से सामने आई कमियों पर क्या कार्रवाई होती है—ये अगले चरण के अहम संकेत होंगे। अभी अधिसूचना में किसी विशेष कंपनी पर नया शुल्क या किसी कामगार के लिए आवेदन प्रक्रिया घोषित नहीं की गई है। इसलिए इसे संस्थागत ढांचे की शुरुआत मानना चाहिए, तैयार लाभ योजना नहीं।