रिटेल बॉन्ड निवेशक सुरक्षा फंड बनाने का सुझाव ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म चलाने वाली कंपनियों ने रखा है। 10 सितंबर को एक उद्योग चर्चा में इस ढांचे को फंड या बीमा जैसी व्यवस्था के रूप में पेश किया गया, ताकि कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने वाले छोटे निवेशकों को डिफॉल्ट की स्थिति में एक तय सीमा तक सहारा मिल सके।
यह अभी उद्योग की ओर से आया विचार है। किसी नियामक ने ऐसा फंड मंजूर, अधिसूचित या लागू नहीं किया है। इसलिए किसी मौजूदा कॉरपोरेट बॉन्ड को इस प्रस्ताव के आधार पर सुरक्षित या बीमित मान लेना गलत होगा।
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सुरक्षा फंड का प्रस्ताव कैसे काम कर सकता है?
चर्चा में भाग लेने वालों ने कहा कि छोटे निवेशकों के लिए एक अधिकतम सुरक्षा सीमा तय की जा सकती है। विचार यह है कि बॉन्ड जारी करने वाली इकाइयों या व्यवस्था से जुड़े पक्षों से एक प्रीमियम लेकर नुकसान की स्थिति के लिए पूल बनाया जाए। प्रीमियम को जारीकर्ता की क्रेडिट रेटिंग और जोखिम से जोड़ने की बात भी रखी गई।
उद्योग प्रतिनिधियों का मत था कि इसे वैकल्पिक रखने से ज्यादा जोखिम वाले जारीकर्ता ही इसमें आने की कोशिश कर सकते हैं। इसे वित्त की भाषा में adverse selection कहा जाता है। इसी कारण कुछ प्रतिभागियों ने सभी पात्र जारीकर्ताओं पर समान नियम लागू करने का सुझाव दिया। ढांचे, पात्रता, दावा प्रक्रिया और भुगतान सीमा पर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
DICGC बीमा और कॉरपोरेट बॉन्ड अलग हैं
प्रस्ताव की तुलना बैंक जमा के लिए मिलने वाले DICGC संरक्षण से की गई, पर दोनों को एक नहीं समझना चाहिए। DICGC की मौजूदा जानकारी बचत, चालू, सावधि और आवर्ती जैसे पात्र बैंक जमा पर लागू होती है। कॉरपोरेट बॉन्ड उस जमा बीमा व्यवस्था का हिस्सा नहीं हैं।
कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेशक किसी कंपनी या संस्था को तय शर्तों पर पैसा उधार देता है। भुगतान जारीकर्ता की वित्तीय स्थिति और बॉन्ड की शर्तों पर निर्भर करता है। प्रस्तावित सुरक्षा व्यवस्था लागू होने से पहले कानूनी आधार, पैसा जुटाने का तरीका और डिफॉल्ट की परिभाषा स्पष्ट करनी होगी।
प्रीमियम और भुगतान पर सवाल बाकी
पैनल में कम डिफॉल्ट दर और कई बॉन्ड के secured होने का उल्लेख हुआ। एक अनुमान के रूप में 0.20 से 0.30 प्रतिशत प्रीमियम की संभावना भी रखी गई, लेकिन यह कोई तय दर नहीं है। secured बॉन्ड में संपत्ति का सहारा हो सकता है, फिर भी भुगतान की तारीख या पूरी रकम वापसी की गारंटी अपने आप नहीं बनती।
चर्चा में एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के करीब ₹150 करोड़ के बॉन्ड डिफॉल्ट का उदाहरण दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार रेटिंग घटने और नकदी दबाव के बाद निवेशक प्रभावित हुए, हालांकि कंपनी ने चार महीने में मूलधन, ब्याज और दंड ब्याज चुका दिया। एक उदाहरण से हर डिफॉल्ट में समान वसूली मान लेना ठीक नहीं होगा।
फिलहाल निवेशक किन बातों की जाँच करें?
कोई नया सुरक्षा ढांचा बनने तक निवेशक जारीकर्ता की क्रेडिट रेटिंग, कर्ज का स्तर, नकदी प्रवाह, बॉन्ड secured है या unsecured, और जल्दी बेचने की सुविधा देखें। अधिक ब्याज दर अक्सर अधिक जोखिम का संकेत हो सकती है। किसी प्लेटफॉर्म पर बॉन्ड उपलब्ध होना उस प्लेटफॉर्म की ओर से मूलधन वापसी की गारंटी नहीं होता।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार के तकनीकी बदलाव पर Demat 2.0 के बॉन्ड पायलट की जानकारी अलग लेख में उपलब्ध है। सुरक्षा फंड पर आगे नियामकीय प्रस्ताव या औपचारिक दस्तावेज आता है, तभी उसके वास्तविक दायरे का आकलन किया जा सकेगा।



