मुंबई, 13 सितंबर 2026: कृषि-इनपुट बनाने वाली एसएमएल लिमिटेड अगले दो से तीन वर्षों में शेयर बाजार में आने की संभावना पर विचार कर रही है। प्रबंध निदेशक बिमल शाह ने कहा है कि कंपनी ने अभी आईपीओ का अंतिम निर्णय नहीं लिया। नई कृषि-रसायन इकाइयों के अनुसंधान और विकास में बढ़ने वाले निवेश की जरूरत इस विकल्प पर सोचने की एक वजह है। इसलिए फिलहाल इसे तय आईपीओ, घोषित तारीख या निवेशकों के लिए खुले निर्गम के रूप में नहीं समझना चाहिए।
फैसला और समय-सीमा दोनों शुरुआती चरण में
शाह के मुताबिक, कंपनी को दिशा अगले एक-दो वर्षों में अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। दो से तीन वर्ष में संभावित सूचीबद्धता की बात भी इसी प्रारंभिक मूल्यांकन का हिस्सा है। अभी निर्गम का आकार, शेयरों की कीमत, बैंकर्स या नियामक दस्तावेज़ों की कोई घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में संभावित निवेश राशि या आईपीओ से मिलने वाली रकम का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
एसएमएल का पुराना नाम सल्फर मिल्स लिमिटेड था। यह कृषि-इनपुट कंपनी है; इसे पहले से शेयर बाजार में सूचीबद्ध वाहन निर्माता एसएमएल महिंद्रा से अलग रखना जरूरी है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उसका कारोबार 80 से अधिक देशों तक फैला है।
अनुसंधान पर जोर क्यों
कंपनी फसल पोषण, फसल सुरक्षा और जैविक उत्पादों के तीन क्षेत्रों में विस्तार कर रही है। शाह ने बताया कि वह नए रासायनिक यौगिकों, यानी कृषि उपयोग के नए सक्रिय अणुओं, पर काम कर रही है। ऐसा शोध सामान्य तैयार फार्मूला बेचने से अलग और अधिक खर्चीला हो सकता है। एक नए अणु पर खर्च का उनका अनुमान लगभग 7 से 8 करोड़ डॉलर है, लेकिन इसे एसएमएल की स्वीकृत परियोजना लागत या निश्चित पूँजी जुटाने के लक्ष्य के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
शाह के अनुसार, कंपनी अब तक यह अनुसंधान अपने संसाधनों से कर रही है। उन्होंने कहा कि उसके पास लगभग ₹450–470 करोड़ की नकदी है और कर्ज बहुत कम है। इस रकम का उपयोग अधिग्रहण, नियामकीय परिसंपत्तियों या रणनीतिक साझेदारी में भी हो सकता है। ये विकल्प हैं; किसी सौदे की पुष्टि नहीं।
मौजूदा वर्ष का कारोबारी लक्ष्य घटाया
कंपनी ने चालू वित्त वर्ष के राजस्व का लक्ष्य पहले के लगभग ₹1,800 करोड़ से घटाकर करीब ₹1,600 करोड़ किया है। प्रबंध निदेशक ने कमजोर मानसून, अमेरिकी शुल्क और माल ढुलाई की बाधाओं को कारण बताया। यह लक्ष्य है, पूरा हो चुका राजस्व नहीं। अगले चरण में आईपीओ पर औपचारिक फैसला और नियामक दस्तावेज़ ही योजना को ठोस रूप देंगे।


