जबलपुर/बालाघाट: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत के दावे वाली जनहित याचिका पर राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, बालाघाट कलेक्टर और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को तय की गई है।
याचिकाकर्ता की मैदानी रिपोर्ट अदालत में पेश
नरसिंहपुर निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी ने समाचार रिपोर्टों के आधार पर जनहित याचिका दायर की थी। प्रारंभिक सुनवाई में अदालत ने कहा था कि केवल प्रकाशित खबरों पर निर्भर रहने के बजाय याचिकाकर्ता प्रभावित इलाकों का दौरा कर तथ्य जुटाए। इसके बाद बुधवार की सुनवाई में उनकी मैदानी रिपोर्ट और हलफनामा अदालत के सामने रखा गया।
पीले पानी, कुपोषण और गंदगी के आरोप
याचिकाकर्ता की रिपोर्ट में दावा किया गया कि प्रभावित क्षेत्रों के कुछ हैंडपंपों से पीला पानी निकल रहा है, महिलाओं और बच्चों को पर्याप्त पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा और साफ-सफाई की स्थिति खराब है। याचिका में इन परिस्थितियों को संक्रमण फैलने और बच्चों की मौतों से जोड़ते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं। ये आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और सरकारी पक्ष का जवाब आना बाकी है।
मौतों की संख्या पर रिपोर्टों में अंतर
अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में प्रभावित बच्चों की संख्या अलग बताई गई है। कुछ रिपोर्टें 30 से अधिक बच्चों की मौत का दावा करती हैं, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में 27 बैगा बच्चों का उल्लेख है। इसलिए अंतिम आधिकारिक संख्या और प्रत्येक मौत के चिकित्सकीय कारण को संबंधित विभागों के जवाब तथा आगे की जांच से स्पष्ट होना होगा।
18 सितंबर को अगली सुनवाई
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की पीठ ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, पोषण और प्रभावित इलाकों में उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आने की संभावना है।