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CINTAA विवाद में कुनिका सदानंद के गंभीर आरोप, दस्तावेज हटाने पर उठाए सवाल

मुंबई: सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) के भीतर चल रहा विवाद अब दस्तावेजों और संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। अभिनेत्री और एसोसिएशन से जुड़ी कुनिका सदानंद ने दावा किया है कि कार्यालय से कुछ कागजात दूसरे स्थान पर ले जाए जा रहे थे। उन्होंने इसे संस्था की पारदर्शिता […]

मुंबई: सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (CINTAA) के भीतर चल रहा विवाद अब दस्तावेजों और संस्था की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। अभिनेत्री और एसोसिएशन से जुड़ी कुनिका सदानंद ने दावा किया है कि कार्यालय से कुछ कागजात दूसरे स्थान पर ले जाए जा रहे थे। उन्होंने इसे संस्था की पारदर्शिता और प्रस्तावित चुनाव की निष्पक्षता से जुड़ा मामला बताया है।

कुनिका के अनुसार, उन्हें सूचना मिली कि पिछली समिति से जुड़े लोग कथित रूप से जल्दबाजी में कागजात निकाल रहे हैं। इसके बाद वह अन्य सदस्यों के साथ कार्यालय पहुंचीं और मामला पुलिस तक गया। उनका कहना है कि पुलिस ने हस्तक्षेप के लिए चैरिटी कमिश्नर के आदेश की आवश्यकता बताई। उन्होंने आशंका जताई कि अदालत में मामला लंबित होने और चुनाव की प्रक्रिया सामने होने के बीच दस्तावेजों का स्थान बदलना संदेह पैदा करता है।

कुनिका ने यह भी आरोप लगाया कि एक वाहन में रखे गए कागजात को फिल्म कर्मचारियों के महासंघ से जुड़े लोगों ने रुकवाया। उनके मुताबिक, कुछ बक्सों को दोबारा कार्यालय में रखकर ताला लगाया गया और पूरी कार्रवाई का वीडियो रिकॉर्ड बनाया गया। उन्होंने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे का नाम लेते हुए कहा कि दस्तावेज सुरक्षित रखने की बात कही गई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्हें कार्यालय से हटाना क्यों जरूरी था।

इस विवाद की दूसरी अहम कड़ी एसोसिएशन की कार्यकारिणी की वैधता है। पूर्व महासचिव उपासना सिंह का दावा है कि 15 निर्वाचित सदस्यों में से आठ के इस्तीफे के बाद समिति भंग मानी जानी चाहिए। उनका कहना है कि संविधान के संबंधित प्रावधान के अनुसार आधे से अधिक पद खाली होने पर नई चुनाव प्रक्रिया कराना आवश्यक है। इसी आधार पर स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव कराने की मांग उठाई गई है।

कुनिका ने पूरे घटनाक्रम को कलाकारों की संस्था की प्रतिष्ठा से जुड़ा बताया और कहा कि वह आगे औपचारिक शिकायत तथा कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाएंगी। फिलहाल ये आरोप कुनिका सदानंद और उपासना सिंह के बयानों पर आधारित हैं। पूनम ढिल्लों, पद्मिनी कोल्हापुरे या मौजूदा पदाधिकारियों का विस्तृत पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने आने पर विवाद की तस्वीर अधिक साफ होगी।

CINTAA हिंदी फिल्म और टेलीविजन उद्योग के कलाकारों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाली प्रमुख संस्था है। इसलिए उसके चुनाव, दस्तावेजों की सुरक्षा और निर्णय प्रक्रिया पर उठे सवाल केवल व्यक्तिगत मतभेद तक सीमित नहीं हैं। आने वाली सुनवाई और चैरिटी कमिश्नर के सामने होने वाली कार्रवाई से यह तय हो सकता है कि रिकॉर्ड किसके नियंत्रण में रहेंगे और नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी।