Diamond Power Infrastructure ने दिवाला समाधान प्रक्रिया से जुड़े ₹2,401 करोड़ के स्वीकृत प्लान को तय समय से लगभग एक साल पहले पूरा करने की घोषणा की है। कंपनी के मुताबिक पुराने ऋणदाताओं के प्रति समाधान प्लान के तहत देय नकद राशि चुका दी गई है और अब वह सामान्य कारोबारी ढांचे में आगे बढ़ेगी।
समाधान योजना में ₹501 करोड़ का नकद भुगतान और ₹1,900 करोड़ के 30 वर्ष की अवधि वाले रिडीमेबल बॉन्ड शामिल थे। नकद हिस्से की अंतिम किस्त 30 सितंबर 2027 तक चुकाई जानी थी, लेकिन कंपनी ने पूर्व भुगतान छूट का उपयोग करते हुए इसे पहले ही पूरा कर दिया। बॉन्ड पर 0.001 प्रतिशत कूपन है और योजना में 16 प्रतिशत वार्षिक दर पर नेट प्रेजेंट वैल्यू के आधार पर रिडेम्पशन का प्रावधान है।
कंपनी के लिए क्या बदलेगा
कंपनी का कहना है कि समाधान प्लान पूरा होने के बाद पुराने ऋणदाताओं के प्रति इस ढांचे के तहत कोई भुगतान दायित्व बाकी नहीं है। इससे सामान्य आधार पर क्रेडिट रेटिंग लेने, बैंक ऋण जुटाने, डेट कैपिटल मार्केट तक पहुंच बनाने और संस्थागत निवेशकों से पूंजी प्राप्त करने का रास्ता आसान हो सकता है।
वडोदरा की एकीकृत उत्पादन इकाई, प्लांट और मशीनरी, रॉड मिल तथा कैप्टिव पावर संपत्तियों पर समाधान काल की पाबंदियाँ हटने की प्रक्रिया भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण है। इन संपत्तियों को अब कार्यशील पूंजी और लंबी अवधि की फंडिंग के लिए सुरक्षा के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पुनर्गठन की पृष्ठभूमि
Diamond Power Infrastructure को अगस्त 2018 में कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल किया गया था। अहमदाबाद पीठ ने जून 2022 में GSEC Limited और राकेश शाह के कंसोर्टियम की समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद निगरानी समिति ने योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया संभाली।
कंपनी की 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट में भी अंतिम सुरक्षित ऋणदाता किस्त का समय से पहले भुगतान, शुल्कों की समाप्ति और नो-ड्यूज पुष्टि की दिशा में प्रगति का उल्लेख था। जुलाई 2026 में कंपनी ने 7.11 करोड़ शेयरों का संस्थागत प्लेसमेंट ₹227 प्रति शेयर पर पूरा किया, जिससे करीब ₹1,614 करोड़ की शुद्ध राशि जुटाई गई। इस पूंजी ने पुराने दायित्व घटाने और विस्तार के लिए कार्यशील पूंजी मजबूत करने में मदद की।
अब उत्पादन विस्तार पर ध्यान
कंपनी अब मध्यम और अतिरिक्त उच्च वोल्टेज केबल क्षमता बढ़ाने, बैकवर्ड इंटीग्रेशन मजबूत करने और ग्राहक आधार विस्तार पर ध्यान दे रही है। वह DICABS ब्रांड के तहत कम, मध्यम, उच्च और अतिरिक्त उच्च वोल्टेज पावर केबल, एरियल बंच्ड केबल, कंट्रोल केबल और ओवरहेड कंडक्टर बनाती है। उसके पास एल्युमीनियम रॉड मिल और कैप्टिव विंड पावर संपत्तियाँ भी हैं।
घोषणा के बाद शुक्रवार को बीएसई पर शेयर 5 प्रतिशत की ऊपरी सीमा के साथ ₹369.60 तक पहुंचा। यह बाजार भाव दिन के दौरान बदल सकता है। समाधान योजना का पूरा होना कंपनी की बैलेंस शीट के पुराने दबाव को कम करता है, लेकिन आगे का प्रदर्शन ऑर्डर बुक, उत्पादन क्षमता, नकदी प्रवाह और नई फंडिंग की लागत पर निर्भर रहेगा।

