नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: सितंबर की शुरुआत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारतीय शेयरों में शुद्ध बिकवाली जारी रही। 11 सितंबर तक के नौ कारोबारी दिनों में इक्विटी से कुल ₹13,138.40 करोड़ का शुद्ध प्रवाह बाहर गया। यह आंकड़ा शेयर बाजार और प्राथमिक बाजार सहित इक्विटी निवेश की खरीद-बिक्री के अंतर से निकलता है। रविवार को घरेलू शेयर बाजार बंद है, इसलिए इसे आज का लाइव कारोबार समझना ठीक नहीं होगा।
नौ दिन में कैसे बना यह आंकड़ा
महीने के पहले दिन ही निकासी ₹5,432.83 करोड़ रही। उसके बाद कुछ दिनों में शुद्ध खरीद भी हुई, लेकिन बिकवाली वाले दिनों का असर अधिक रहा। 11 सितंबर को अकेले इक्विटी में शुद्ध निकासी ₹226.08 करोड़ थी। सभी नौ कारोबारी दिनों के दैनिक इक्विटी आंकड़ों को जोड़ने पर ₹13,138.40 करोड़ का कुल शुद्ध बहिर्वाह सामने आता है। ₹13,138 करोड़ इसी रकम का पूर्णांक में प्रस्तुत रूप है।
यह रकम बाजार में हर दिन हुए कुल सौदों का मूल्य नहीं है। निवेशकों की कुल खरीद में से कुल बिक्री घटाने पर शुद्ध प्रवाह निकलता है। इसी वजह से किसी एक दिन सूचकांक का चढ़ना या गिरना सीधे उसी दिन के एफपीआई प्रवाह के बराबर नहीं होता। प्राथमिक निर्गम और अन्य इक्विटी सौदे भी अंतिम आंकड़े को बदल सकते हैं।
बाजार के लिए क्या मायने
विदेशी संस्थागत धन का रुख शेयरों की मांग और निवेशकों की धारणा पर असर डाल सकता है, खासकर बड़े शेयरों में। फिर भी सूचकांकों की चाल केवल विदेशी निवेश से तय नहीं होती। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद, कंपनियों के नतीजे, ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी साथ में काम करते हैं। इसलिए इस प्रवाह को बाजार की दिशा का अकेला संकेत मानना भ्रामक होगा।
सितंबर में कच्चे तेल के ऊंचे दाम, अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल और डॉलर की मजबूती को लेकर चिंता चर्चा में रही है। ये परिस्थितियां उभरते बाजारों में जोखिम लेने की इच्छा को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन उपलब्ध दैनिक आंकड़े अपने आप यह साबित नहीं करते कि निकासी का एकमात्र कारण यही था। अगले कारोबारी सत्रों में प्रवाह और बाजार भाव अलग-अलग समय पर बदल सकते हैं।
आगे किन आंकड़ों पर नजर रहेगी
अब निवेशक 14 सितंबर के बाजार अवकाश के बाद खुलने वाले सत्र, विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों के पुष्ट दैनिक आंकड़ों तथा तेल और बॉन्ड बाजार की दिशा पर नजर रखेंगे। दैनिक प्रवाह की शुरुआती संख्या बाद में डिपॉजिटरी के पुष्ट आंकड़ों से अलग हो सकती है; तुलना करते समय दोनों की रिपोर्टिंग तिथि और निवेश श्रेणी समान रखना जरूरी है।



