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सोना–चांदी फिर दबाव में: गोल्ड ₹1.52 लाख, सिल्वर ₹2.33 लाख के करीब

दोपहर 3:22 बजे नया अपडेट: कीमती धातुओं पर बिकवाली फिर बढ़ी। एक ताज़ा फीड में गोल्ड ₹1,52,020 प्रति 10 ग्राम पर ₹321 यानी 0.21 प्रतिशत नीचे था, जबकि दूसरी delayed feed में यह ₹1,52,218 पर ₹340 कमजोर दिखा। दिसंबर सिल्वर करीब ₹2,33,440 से ₹2,33,485 प्रति किलो के बीच रही और दोनों फीड में गिरावट दर्ज हुई। अलग कॉन्ट्रैक्ट और refresh समय से स्तरों में मामूली अंतर संभव है।

दोपहर 2:45 बजे नया अपडेट: सुबह की गिरावट के बाद आई तेजी टिक नहीं सकी और कीमती धातुएँ फिर सपाट से कमजोर दायरे में आ गईं। दो ताज़ा बाजार फीड में गोल्ड करीब ₹1,52,380 से ₹1,52,493 प्रति 10 ग्राम के बीच दिखा। एक फीड में बदलाव ₹39 की बढ़त और दूसरे में ₹65 की कमजोरी था। चांदी करीब ₹2,33,978 प्रति किलो पर ₹679 नीचे दिखाई दी। अलग कॉन्ट्रैक्ट और refresh समय के कारण स्क्रीन पर मामूली अंतर हो सकता है।

दोपहर 2:20 बजे: एमसीएक्स पर अक्टूबर गोल्ड ₹1,52,743 और दिसंबर सिल्वर ₹2,34,279 तक संभले थे। इसके बाद भाव फिर नीचे आए, जिससे पूरे दिन ऊंचा उतार-चढ़ाव बना रहा।

सुबह 11:30 बजे: अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹684 यानी 0.45 प्रतिशत गिरकर करीब ₹1,51,657 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। दिन में सोने ने ₹1,50,695 का निचला और ₹1,51,800 का शुरुआती ऊपरी स्तर छुआ था।

दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स सुबह ₹1,731 यानी 0.74 प्रतिशत कमजोर होकर लगभग ₹2,32,368 प्रति किलो पर आया था। कारोबार के दौरान चांदी ₹2,30,270 तक फिसली और शुरुआती ऊपरी स्तर ₹2,32,650 रहा।

गोल्ड और सिल्वर ETF पर भी दबाव

शेयर बाजार में सूचीबद्ध गोल्ड ईटीएफ सुबह करीब 0.5 से 1 प्रतिशत तक नीचे दिखाई दिए। सिल्वर ईटीएफ में लगभग 1 से 2 प्रतिशत की कमजोरी रही। अलग-अलग फंड के भाव, नेट एसेट वैल्यू, खरीद-बिक्री की उपलब्धता और ट्रैकिंग एरर अलग होने से गिरावट का प्रतिशत एक जैसा नहीं रहा।

गोल्ड ईटीएफ निवेशकों को बिना भौतिक सोना रखे कीमत की चाल में भागीदारी देता है। सिल्वर ईटीएफ भी घरेलू चांदी के भाव को ट्रैक करता है। फंड का खर्च और ट्रैकिंग अंतर होने के कारण ईटीएफ का रिटर्न धातु के वास्तविक भाव से थोड़ा अलग हो सकता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर का असर

सोना–चांदी पर सबसे बड़ा दबाव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से आया। अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत के करीब पहुंचने से बिना ब्याज देने वाले सोने का आकर्षण घटा। जब सुरक्षित सरकारी बॉन्ड पर ऊंचा रिटर्न मिलता है, तब बड़े निवेशकों का कुछ पैसा कीमती धातुओं से बॉन्ड की ओर जा सकता है।

डॉलर की मजबूती ने भी कीमतों पर दबाव बनाया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी डॉलर में खरीदे-बेचे जाते हैं। डॉलर मजबूत होने पर दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए धातुएँ महंगी पड़ती हैं, जिससे मांग कमजोर हो सकती है। अमेरिका में अगस्त का उत्पादक मूल्य सूचकांक 0.4 प्रतिशत बढ़ने से ब्याज दर लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका भी बढ़ी।

रुपये की कमजोरी ने घरेलू गिरावट सीमित की

डॉलर के मुकाबले रुपया दोपहर में करीब 95.58 पर था। भारत सोना और चांदी आयात करता है, इसलिए कमजोर रुपया घरेलू कीमतों को सहारा देता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की पूरी गिरावट भारतीय एमसीएक्स और ईटीएफ भावों में नहीं उतरी। रुपया मजबूत रहता तो घरेलू कीमतों पर दबाव अधिक हो सकता था।

चांदी में उतार-चढ़ाव ज्यादा क्यों

चांदी की भूमिका कीमती धातु के साथ औद्योगिक कच्चे माल की भी है। इसका उपयोग सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है। ऊंची ब्याज दर और महंगा कच्चा तेल वैश्विक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं, जिससे औद्योगिक मांग पर असर पड़ने का डर बढ़ता है। चांदी का बाजार सोने से छोटा होने के कारण बड़ी खरीद या बिकवाली से भाव में तेज बदलाव भी आता है।

भू-राजनीतिक तनाव सोने को सुरक्षित निवेश की मांग से सहारा दे रहा है, लेकिन ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर का दबाव बना हुआ है। आगे अमेरिकी महंगाई के आंकड़े, केंद्रीय बैंक का रुख, डॉलर इंडेक्स, रुपये की चाल और वैश्विक तनाव कीमतों की दिशा तय करेंगे। सभी स्तर इंट्राडे हैं और बाजार बंद होने तक बदल सकते हैं।