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गुजरात विधानसभा ने शिक्षा संशोधन विधेयक पारित किया, बिना पंजीकरण स्कूल पर ₹15 लाख तक जुर्माना

गांधीनगर, 11 सितंबर 2026। गुजरात विधानसभा ने गुजरात माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 को बहुमत से पारित कर दिया है। संशोधन में सरकारी सहायता प्राप्त निजी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों को 1972 के शिक्षा अधिनियम के दायरे में अधिक स्पष्ट रूप से लाने तथा नियम उल्लंघन पर दंड बढ़ाने का प्रावधान है।

विधेयक के अनुसार सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रधानाचार्य, शिक्षक, विशेष शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की योग्यता तथा चयन प्रक्रिया राज्य सरकार तय कर सकेगी। ऐसे स्कूलों की भर्ती में राज्य की लागू आरक्षण नीति का पालन सुनिश्चित करने का प्रावधान भी किया गया है। गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में सरकार कर्मचारियों की योग्यता निर्धारित करेगी।

बिना वैध पंजीकरण के माध्यमिक या उच्चतर माध्यमिक स्कूल चलाने पर एक से दो वर्ष तक कारावास, ₹10 लाख से ₹15 लाख तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। सहायता प्राप्त स्कूल में शिक्षक या प्रधानाचार्य की अवैध नियुक्ति पर अधिकतम ₹10 लाख और शैक्षणिक सत्र के दौरान बोर्ड को छह महीने का पूर्व नोटिस दिए बिना स्कूल बंद करने पर ₹20 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है।

संशोधन में दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति का वैधानिक ढांचा भी शामिल है। इसके अलावा बोर्ड में शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और अभिभावक संगठनों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के प्रावधान लागू होने की प्रक्रिया अधिसूचना और संबंधित नियम जारी होने पर स्पष्ट होगी।