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भाषाई विस्तार में जुटी हनुमान अंश टीम भारत की ऑस्कर आवेदन समयसीमा चूक गई

हनुमान अंश की निर्माता नम्रता सिंह के अनुसार, फिल्म को इस बार भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के लिए विचारार्थ भेजने की समयसीमा निकल गई। उन्होंने बताया कि छोटी टीम फिल्म की रिलीज़ के बाद कई काम एक साथ संभाल रही थी और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी समय पर नहीं हो सकी। यह भारत से चयन की प्रक्रिया में आवेदन न कर पाने की बात है; फिल्म को ऑस्कर में नामांकन मिला था या अस्वीकार किया गया, ऐसा दावा नहीं है।

निर्माता ने किन कामों का जिक्र किया

नम्रता ने कहा कि टीम तेलुगु डबिंग, अन्य भाषाओं की तैयारी और अधिक दर्शकों के लिए फिल्म को सुलभ बनाने पर काम कर रही है। कलाकार और निर्देशक भी प्रचार व प्रदर्शन से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त हैं। निर्माता के मुताबिक, दफ्तर में सीमित लोग होने से कई जिम्मेदारियाँ एक साथ आ गईं। उन्होंने आवेदन छूटने को इसी व्यस्तता और प्रक्रिया की जानकारी न होने से जोड़ा।

फिल्म का भारत में प्रदर्शन 7 अगस्त को शुरू हुआ था और हाल में विदेशी बाजार में भी इसके प्रदर्शन की तैयारी की गई। टीम अब अलग भाषा के दर्शकों तक पहुँचने की कोशिश कर रही है। इन कार्यों की समयरेखा निर्माता के बताए अनुभव का हिस्सा है; ऑस्कर की चयन समिति के किसी निर्णय के रूप में इसे नहीं पढ़ना चाहिए।

आधिकारिक प्रविष्टि और पुरस्कार में अंतर

सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी में भारत की तरफ से विचारार्थ फिल्म भेजने के लिए पहले आवेदन और फिर देश की चयन प्रक्रिया होती है। देश की आधिकारिक प्रविष्टि बनना भी सीधे ऑस्कर नामांकन या पुरस्कार मिलना नहीं होता। नम्रता की बात केवल इस साल की भारतीय प्रविष्टि के आवेदन से संबंधित है। बाकी श्रेणियों की पात्रता पर उन्होंने कोई निश्चित घोषणा नहीं की।

इस घटनाक्रम के साथ फिल्म की अगली भाषाओं में उपलब्धता और निर्माण टीम की योजनाओं पर ध्यान बना रहेगा। भविष्य की किसी पुरस्कार प्रक्रिया या दूसरे भाग के बारे में औपचारिक जानकारी आने पर ही उसे तय मानना उचित होगा।