HDFC Bank के शीर्ष नेतृत्व में अगला बदलाव अभी चयन और नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया में है। बैंक के निदेशक मंडल की 12 सितंबर की बैठक के बारे में उपलब्ध विवरण के अनुसार, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD-CEO) पद के लिए दो उम्मीदवारों के नाम प्राथमिकता क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक को भेजने का फैसला हुआ है। इन उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक विवरण में नहीं बताए गए हैं। तीन साल की प्रस्तावित नियुक्ति को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी; इसके लिए RBI की स्वीकृति आवश्यक है।
बोर्ड के इस कदम का अर्थ यह है कि बैंक ने अपना विकल्प चुना है और अब नियामक से आगे की मंजूरी लेनी होगी। दोनों संभावित उम्मीदवारों के प्रस्तावित पारिश्रमिक का ब्योरा भी RBI के समक्ष रखने की बात कही गई है। अभी किसी व्यक्ति को अगले MD-CEO के रूप में घोषित करना सही नहीं होगा। मंजूरी, नियुक्ति की प्रभावी तारीख और अंतिम शर्तें तय होने पर ही नेतृत्व परिवर्तन का पूरा स्वरूप स्पष्ट होगा।
दो कार्यकारी निदेशकों के प्रस्ताव
इसी बैठक में मौजूदा कार्यकारी निदेशक वी. श्रीनिवास रंगन को 23 नवंबर 2026 से 22 नवंबर 2027 तक एक वर्ष के लिए दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव मंजूर हुआ। यह कार्यकाल भी RBI की अनुमति के अधीन है। प्रस्तावित अवधि को तत्काल प्रभावी नया कार्यकाल समझने की जरूरत नहीं है; अभी उनकी मौजूदा जिम्मेदारियां अलग हैं।
बोर्ड ने जिमी टाटा को तीन वर्ष के लिए कार्यकारी निदेशक बनाने के प्रस्ताव पर भी सहमति दी है। उपलब्ध विवरण में उनका कार्यकाल RBI से मंजूरी मिलने की तारीख से शुरू होने या नियामक द्वारा तय शर्तों के अनुसार होने की बात है। वह बैंक में फिलहाल मुख्य ऋण अधिकारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसलिए उन्हें अभी से नए पद पर कार्यरत बताना गलत होगा।
बोर्ड की संरचना में क्या बदल सकता है?
बैंक ने एक और पूर्णकालिक निदेशक का पद बनाने का फैसला भी किया है। योजना लागू होने पर MD-CEO के अलावा पूर्णकालिक निदेशकों की संख्या चार हो सकती है। इस अतिरिक्त पद पर नियुक्ति नए MD-CEO के कार्यभार संभालने के बाद परामर्श से किए जाने की बात सामने आई है। जिन कदमों में शेयरधारकों की अनुमति आवश्यक होगी, वे उस प्रक्रिया के बाद ही आगे बढ़ेंगे।
इन प्रस्तावों में उत्तराधिकार की तैयारी और कारोबार तथा सहायक कंपनियों की निगरानी के लिए प्रबंधन क्षमता बढ़ाने का संकेत है। मगर बोर्ड की स्वीकृति, RBI की मंजूरी और शेयरधारकों की जरूरी सहमति अलग-अलग चरण हैं। बैंक के ग्राहक खातों, जमा या सेवाओं में इस बैठक के कारण कोई तत्काल बदलाव घोषित नहीं हुआ है। बाजार में भी शनिवार को नियमित शेयर कारोबार नहीं होता, इसलिए शुक्रवार के बंद भाव को इस खबर के बाद की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।



