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IGL की बिक्री बढ़ी, पर सितंबर तिमाही में standalone लाभ 93.5% घटा

गैस पाइपलाइन, मीटर और बढ़ती बिक्री के बीच घटते लाभ का प्रतीकात्मक चित्र

IGL Q2 FY27 नतीजों में सितंबर तिमाही के दौरान कारोबार का पैमाना बढ़ा, लेकिन लागत ने कमाई पर भारी दबाव डाला। कंपनी के standalone नतीजों में जुलाई-सितंबर 2026 का शुद्ध लाभ ₹24.38 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह ₹372.51 करोड़ था। यानी साल-दर-साल लाभ करीब 93.5% घटा। इसके साथ ही बिक्री के कुछ संकेत मजबूत रहे: परिचालन से आय ₹5,613.62 करोड़ तक पहुंची और औसत दैनिक गैस बिक्री पहली बार 10.06 MMSCMD दर्ज की गई।

वॉल्यूम बढ़े, लाभ क्यों घटा

तिमाही में परिचालन आय पिछले साल के ₹4,445.89 करोड़ से करीब 26.3% अधिक रही। कंपनी की कुल गैस बिक्री मात्रा लगभग 8% बढ़ी। संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) की मात्रा में 9% और पाइप से घरों तक पहुंचने वाली गैस (PNG) की बिक्री में 8% सालाना बढ़त दर्ज की गई। दैनिक औसत बिक्री 9.31 MMSCMD से बढ़कर 10.06 MMSCMD हुई। इन आंकड़ों से मांग और वितरण में विस्तार का संकेत मिलता है, लेकिन अधिक बिक्री अपने आप बेहतर लाभ सुनिश्चित नहीं करती।

लागत पक्ष में प्राकृतिक गैस की खरीद पर खर्च बढ़ा। कंपनी के नतीजों में इस मद का खर्च पिछले साल की सितंबर तिमाही के लगभग ₹3,141 करोड़ से इस बार ₹4,646 करोड़ रहा। साथ में कुल खर्च ₹4,133 करोड़ से बढ़कर ₹5,790 करोड़ हुआ। आय के मुकाबले खर्च की तेज बढ़त ने लाभ को दबाया; इसीलिए ऊंची बिक्री और अधिक गैस मात्रा के बावजूद मुनाफे में तेज गिरावट आई।

निवेशकों के लिए किन आंकड़ों को अलग-अलग पढ़ें

रिपोर्ट की गई संख्या standalone नतीजों की है। कंपनी ने consolidated नतीजे भी जारी किए हैं, जिनके लाभ और आय के आंकड़े अलग हैं। इसलिए अलग-अलग जगह दिखने वाले ₹24.38 करोड़ standalone लाभ था, जबकि consolidated शुद्ध लाभ ₹23.75 करोड़ रहा। दोनों अलग रिपोर्टिंग आधार हैं; निवेशक तुलना करते समय यह स्पष्ट रखें कि कौन-सा आंकड़ा standalone है और कौन-सा consolidated।

परिचालन से आय ₹5,613.62 करोड़ रही। इसे अन्य आय सहित कुल आय से अलग समझना चाहिए: standalone कुल आय ₹5,799.51 करोड़ थी। तिमाही नतीजों की तुलना करते समय रिपोर्टिंग आधार और आय की परिभाषा देखना जरूरी है।

आगे का संकेत

IGL दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के कई क्षेत्रों में CNG तथा PNG नेटवर्क चलाती है। तिमाही में बढ़ती मात्रा ने कारोबार की पहुंच दिखाई, जबकि लाभ में गिरावट ने गैस खरीद लागत और उपभोक्ता मूल्य के बीच संतुलन का महत्व सामने रखा। आगे के परिणामों में निवेशक बिक्री मात्रा, गैस खरीद लागत, कुल खर्च और प्रति इकाई मार्जिन को साथ देखकर समझ सकते हैं कि मांग में बढ़त लाभ में बदल रही है या नहीं। इन नतीजों से किसी शेयर के भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं निकलती।