भारत के 190 परमाणु हथियार होने का अनुमान एक नए अमेरिकी शोध आकलन में लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने हाल के वर्षों में अपनी परमाणु क्षमता का आधुनिकीकरण तेज किया है और जमीन, हवा तथा समुद्र से इस्तेमाल किए जा सकने वाले साधनों को विकसित किया है। हालांकि 190 की संख्या भारत सरकार की घोषित या आधिकारिक गिनती नहीं है। यह सार्वजनिक सूचनाओं, सरकारी दस्तावेजों, उपग्रह चित्रों और विशेषज्ञ विश्लेषण पर आधारित स्वतंत्र अनुमान है।
190 का आंकड़ा कैसे समझें
आकलन के अनुसार भारत के पास 2026 की शुरुआत तक लगभग 730 किलोग्राम हथियार-स्तर का प्लूटोनियम हो सकता है। इसमें करीब 170 किलोग्राम कम या ज्यादा की अनिश्चितता बताई गई है। अलग-अलग वॉरहेड डिजाइन में प्लूटोनियम की जरूरत बदलती है, इसलिए उपलब्ध सामग्री से सैद्धांतिक रूप से लगभग 140 से 225 हथियार बनने की संभावना निकाली गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इतनी पूरी संख्या वास्तव में तैयार हो चुकी है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत ने अधिकतम करीब 190 वॉरहेड जोड़े हो सकते हैं। इनमें 160 से अधिक मौजूदा परिचालन लॉन्चरों के लिए और कुछ नई मिसाइल प्रणालियों के लिए बने हो सकते हैं। भारतीय सरकार अपने परमाणु भंडार का आकार सार्वजनिक नहीं करती, इसलिए हर संख्या के साथ अनिश्चितता जुड़ी है।
नौ परमाणु-सक्षम प्रणालियों का आकलन
रिपोर्ट में भारत द्वारा नौ अलग-अलग परमाणु-सक्षम प्रणालियां चलाए जाने का अनुमान है। इनमें दो प्रकार के लड़ाकू विमान, जमीन से दागी जाने वाली छह प्रकार की बैलिस्टिक मिसाइलें और समुद्र से दागी जाने वाली एक बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली शामिल है। कम से कम दो और प्रणालियों को विकास के अंतिम चरण के करीब बताया गया है।
जमीन आधारित ताकत में पृथ्वी-II और अग्नि श्रृंखला की अलग-अलग दूरी वाली मिसाइलों का उल्लेख है। अग्नि-V में एक मिसाइल से अलग-अलग लक्ष्यों की ओर कई वॉरहेड भेजने वाली MIRV तकनीक के परीक्षण की चर्चा भी की गई है। विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है कि ऐसी व्यवस्था में मिसाइल करीब तीन वॉरहेड ले जा सकती है, लेकिन यह सार्वजनिक रूप से पुष्टि की गई परिचालन तैनाती नहीं है।
पनडुब्बियों से मजबूत हो रहा समुद्री हिस्सा
समुद्र आधारित क्षमता को परमाणु त्रिकोण का अधिक सुरक्षित हिस्सा माना जाता है, क्योंकि पनडुब्बी छिपकर जवाबी कार्रवाई की क्षमता बचाए रख सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी आईएनएस अरिधमान को 3 अप्रैल 2026 को सेवा में शामिल किया गया बताया गया है। इसे आठ मिसाइल ट्यूब से लैस माना गया है, जो पहली दो पनडुब्बियों में बताई गई संख्या से दोगुनी है। अगली अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी को 2027 में शामिल किए जाने की योजना बताई गई है।
पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली मिसाइलें भारत की जवाबी प्रहार क्षमता को मजबूत करती हैं। फिर भी हथियार, मिसाइल और परिचालन गश्त से जुड़ी कई जानकारियां गोपनीय रहती हैं। सार्वजनिक जानकारी से किया गया विश्लेषण किसी खास समय पर वास्तविक तैनाती का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फास्ट ब्रीडर रिएक्टर और 35 वॉरहेड का दावा
अप्रैल 2026 में 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली क्रिटिकलिटी हासिल की। विशेषज्ञों का गणित है कि यदि यह रिएक्टर 80 प्रतिशत दक्षता पर चले तो वह साल में लगभग 140 किलोग्राम प्लूटोनियम-239 तैयार कर सकता है, जो सैद्धांतिक रूप से अधिकतम 35 वॉरहेड के लिए पर्याप्त हो सकता है। यह संभावित वार्षिक क्षमता का अनुमान है; इसका मतलब यह नहीं कि 35 अतिरिक्त हथियार बन चुके हैं या निश्चित रूप से बनाए जाएंगे।
रणनीति में पाकिस्तान के साथ चीन का पहलू
भारत की परमाणु रणनीति लंबे समय तक पाकिस्तान केंद्रित मानी जाती रही है, लेकिन लंबी दूरी की नई मिसाइलें और समुद्री क्षमता चीन को ध्यान में रखने की ओर संकेत करती हैं। भारत की घोषित नीति विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता और पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल न करने की रही है, हालांकि रासायनिक या जैविक हमले के जवाब से जुड़ी शर्तों और समय-समय पर आए राजनीतिक बयानों के कारण नीति पर बहस होती रही है।
भारत के 190 परमाणु हथियार वाला आंकड़ा इसलिए निश्चित सरकारी संख्या की तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए। यह उपलब्ध सूचनाओं से निकला विशेषज्ञ अनुमान है, जो भारत के आधुनिकीकरण की दिशा और संभावित क्षमता समझाता है। वास्तविक भंडार, निर्माण और तैनाती की सटीक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।


