नई दिल्ली, 24 सितंबर 2026। भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-2026 अभियान के दौरान मिस्र के अलेक्जेंड्रिया बंदरगाह पहुँचा है। पोत का आगमन 23 सितंबर को हुआ। दस महीने की इस समुद्री यात्रा में यह उसका अलेक्जेंड्रिया का दूसरा दौरा है, जहाँ भारत और मिस्र की नौसेनाओं के बीच पेशेवर संपर्क की गतिविधियाँ प्रस्तावित हैं।
बंदरगाह पर स्वागत, अब आपसी मुलाकातें
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अलेक्जेंड्रिया नौसैनिक अड्डे के कमांडर रियर एडमिरल मोहम्मद अब्देल अजीज और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों ने पोत का स्वागत किया। प्रवास के दौरान शिष्टाचार मुलाकातों, एक-दूसरे के पोतों के दौरे और मिस्र की नौसेना के साथ पेशेवर संवाद की योजना है।
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नौसैनिक अनुभव साझा करना और दोनों देशों के समुद्री संबंधों को मजबूत करना है। मंत्रालय की सूचना में इन्हें आगामी गतिविधियों के रूप में बताया गया है; सभी कार्यक्रम संपन्न होने का दावा नहीं किया गया है।
कोच्चि से शुरू हुआ दस महीने का अभियान
तीन मस्तूल वाला यह प्रशिक्षण पोत 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से निकला था। अभियान के कार्यक्रम में 13 देशों के 18 बंदरगाहों की यात्रा और लगभग 22,000 समुद्री मील की दूरी तय करना शामिल है। यह पूरे अभियान का निर्धारित दायरा है, अब तक पूरी हो चुकी दूरी का आंकड़ा नहीं।
रास्ते में पोत अरब सागर, लाल सागर और भूमध्य सागर से होकर गुजरा तथा स्वेज नहर पार की। फ्रांस के एस्केल ए सेते समुद्री महोत्सव में भी उसने हिस्सा लिया।
अटलांटिक पार करने का अनुभव भी मिला
अभियान के दौरान सुदर्शिनी ने पहली बार अटलांटिक महासागर पार किया। केप वर्डे से 19 दिन की यात्रा के बाद वह 27 मई को एंटीगुआ पहुँचा था। इसी समुद्री सफर में कोच्चि से प्रस्थान के बाद 10,000 समुद्री मील पूरे करने का पड़ाव भी आया।
इसके बाद अजोरेस और पुर्तगाल की ओर यात्रा हुई। 22 अगस्त को लिस्बन पहुँचना सात महीनों में पोत का 15वाँ बंदरगाह पड़ाव था। अब अलेक्जेंड्रिया वापसी के साथ अभियान का एक और चरण आगे बढ़ा है।
प्रशिक्षुओं के लिए समुद्र में व्यावहारिक सीख
लंबी यात्रा के माध्यम से प्रशिक्षुओं को समुद्री नौवहन, पाल संभालने, खुले समुद्र में पोत संचालन और पारंपरिक नाविक कौशल का अनुभव मिल रहा है। यह प्रशिक्षण बंदरगाह पर होने वाले पेशेवर आदान-प्रदान से भी जुड़ता है।
अलेक्जेंड्रिया की ताजा यात्रा प्रशिक्षण और समुद्री संपर्क, दोनों उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है। अगले चरण में प्रस्तावित द्विपक्षीय गतिविधियों के संपन्न होने और आगे की यात्रा का विवरण महत्वपूर्ण होगा। वर्तमान विज्ञप्ति में अलेक्जेंड्रिया से प्रस्थान की तारीख नहीं बताई गई है।



