देश की आवाज़ न्यूज डेस्क | धनबाद, 15 सितंबर 2026। धनबाद के खनन क्षेत्रों में हालिया भू-धंसान की घटनाओं के बाद प्रभावित बस्तियों की सुरक्षा और पुनर्वास पर फिर सवाल उठे हैं। 8 सितंबर को सिजुआ इलाके में घर क्षतिग्रस्त होने से एक बच्चे की मौत और छह लोगों के घायल होने की सूचना पुलिस के हवाले से मिली थी। 13 सितंबर को कतरास के रामकनाली क्षेत्र में संदिग्ध अवैध खनन के दौरान जमीन धंसने से तीन लोगों की मौत की बाद की पुलिस रिपोर्ट सामने आई। दोनों घटनाओं की जगह और कारण अलग हैं; इन्हें पूरे जिले के एक हादसे की संख्या न समझें।
धनबाद शहर से सटे हिस्सों, झरिया, कतरास और निरसा के क्षेत्रवार अनुमानों को जोड़कर एक स्थानीय रिपोर्ट ने 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक जमीन और 2.3 से 2.75 लाख निवासियों को संभावित जोखिम से जोड़ा है। यह सर्वेक्षण से पुष्टि की गई अंतिम सरकारी सूची नहीं है। किसी खास घर या मोहल्ले को इस संख्या के आधार पर अकेले सुरक्षित या असुरक्षित घोषित नहीं किया जा सकता। भूमिगत पुरानी खदानें, छोड़े गए खाली स्थान, कमजोर आधार, आग और अनियंत्रित खनन कई स्थानों पर जोखिम बढ़ा सकते हैं।
केंद्र ने जून 2025 में आग, भू-धंसान और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए संशोधित झरिया मास्टर प्लान को ₹5,940.47 करोड़ की लागत से मंजूरी दी थी। सरकारी विवरण के अनुसार दिसंबर 2028 तक 15,080 परिवारों को स्थानांतरित करने का लक्ष्य है। यह लक्ष्य पूरे धनबाद की ऊपर दी गई अनुमानित आबादी के बराबर नहीं है; योजना विशेष रूप से झरिया कोयला क्षेत्र के लिए है। स्थानीय रिपोर्ट में चिह्नित जगहों पर पुनर्वास की गति और अन्य संवेदनशील इलाकों की पहचान पर प्रश्न उठाया गया है।
प्रभावित बस्ती में नई दरार, जमीन का अचानक धंसना, गैस या आग के संकेत दिखें तो वहाँ जाने से बचें और जिला प्रशासन, स्थानीय पुलिस तथा खनन प्रबंधन को तुरंत सूचित करें। राहत, स्थल सर्वेक्षण और पुनर्वास का निर्णय संबंधित प्राधिकरण के अद्यतन आकलन पर निर्भर करेगा।