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BRICS अतिथि किट में कोरापुट कॉफी, आदिवासी किसानों के उत्पाद को पहचान

कोरापुट में छाया में उगी कॉफी के फलों की तुड़ाई का सांकेतिक दृश्य

ओडिशा के कोरापुट की कॉफी को नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन की अतिथि किट में जगह मिली। किट में ‘टाइगर ब्राइट’ नाम से 250 ग्राम कॉफी का पैकेट रखा गया। इस चयन से आदिवासी किसानों के उत्पाद को पहचान मिली है, हालांकि इससे किसानों की आय कितनी बढ़ेगी, इसका कोई प्रमाणित अनुमान अभी नहीं है।

नंदापुर और मछकुंड की खेती

कोरापुट जिले के नंदापुर और मछकुंड इलाके में करीब 920 से 950 मीटर ऊंचाई पर अरेबिका कॉफी उगाई जाती है। पौधे आम, कटहल और दूसरे पेड़ों की छाया में लगाए जाते हैं। पके फलों को हाथ से चुनकर आगे सुखाने और प्रसंस्करण के लिए भेजा जाता है। खेती के साथ खरीद और बाजार तक पहुंच में सहकारी व्यवस्था की भूमिका है।

खरीद के आंकड़े क्या बताते हैं?

ट्राइबल डेवलपमेंट कोऑपरेटिव कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (TDCCOL) किसानों से कॉफी फल खरीदकर सुखाने, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण और पैकिंग की प्रक्रिया संभालती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार संस्था ने 2025-26 में 102.54 मीट्रिक टन कॉफी फल खरीदे। 2024-25 में यह मात्रा 34.41 मीट्रिक टन थी। लगभग 360 आदिवासी किसान परिवार इस खरीद से जुड़े बताए गए हैं। खरीदी गई मात्रा और प्रति परिवार वास्तविक आय अलग बातें हैं; आय का हिसाब कीमत और लागत के बिना नहीं लगाया जा सकता।

बाजार का अवसर

कॉफी को अंतरराष्ट्रीय अतिथियों तक पहुंचने से नए खरीदारों का ध्यान मिल सकता है। ओडिशा सरकार ने इसे स्थानीय उत्पादों के लिए अवसर बताया है। अभी नए निर्यात अनुबंध, बढ़ी कीमत या किसानों के भुगतान की पुष्ट घोषणा नहीं हुई है। आगे किसानों को लाभ का सही आकलन खरीद दर, नियमित मांग और सहकारी भुगतान के आंकड़ों से ही हो सकेगा।