लेह, 12 सितंबर: लद्दाख राज्य वन्यजीव बोर्ड ने तीन संरक्षित क्षेत्रों की सीमाएँ तय करने संबंधी उपसमिति की रिपोर्ट में खामियाँ पाकर उसे अलग रख दिया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की 16वीं बैठक के बाद लोक भवन के प्रवक्ता ने बताया कि हेमिस राष्ट्रीय उद्यान, चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य और काराकोरम (नुब्रा-श्योक) अभयारण्य में रहने वाले समुदायों के अधिकार और दावों के निपटारे की प्रक्रिया दो महीने में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड के अनुसार, उपसमिति ने कुछ पुरानी बस्तियों और रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों को अपनी प्रस्तावित सीमाओं में शामिल किया, जबकि प्रभावित लोगों के भूमि और परंपरागत अधिकारों की वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। उपराज्यपाल ने कहा कि सीमांकन में रक्षा संबंधी पहलुओं तथा अधिकृत मानचित्रों को भी पर्याप्त आधार नहीं बनाया गया। ये आपत्तियाँ बोर्ड की रिपोर्ट पर हैं; तीनों संरक्षित क्षेत्रों की अंतिम नई सीमाएँ अभी तय नहीं हुई हैं।
नामित उपायुक्तों और सेटलमेंट अधिकारियों को सार्वजनिक सुनवाई फिर शुरू करने को कहा गया है। स्थानीय लोगों से भूमि के दस्तावेज, चरागाहों सहित पारंपरिक अधिकारों के दावे और संबंधित जानकारी देने का आग्रह किया गया है, ताकि सीमाओं पर आगे का निर्णय कानूनी प्रक्रिया और समुदायों की भागीदारी के बाद लिया जा सके।
बोर्ड ने बिजली आपूर्ति, रक्षा और अन्य जरूरी कामों से जुड़े 23 प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति के पास मंजूरी के लिए भेजा है। इन्हें अंतिम पर्यावरण या वन्यजीव स्वीकृति मिल चुकी है, ऐसा कहना अभी सही नहीं होगा।