मैक्सवोल्ट एनर्जी इंडस्ट्रीज ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में प्रस्तावित बैटरी पैक निर्माण सुविधा के लिए 23 सितंबर 2026 को भूमि पूजन किया। कंपनी की योजना इस परियोजना में करीब ₹700 करोड़ निवेश करने की है। नए संयंत्र की प्रस्तावित सालाना क्षमता 10 गीगावॉट-घंटे यानी GWh होगी। अभी परियोजना का शिलान्यास हुआ है; वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने की घोषणा नहीं की गई है।
इस विस्तार के जरिए कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ ऊर्जा भंडारण और औद्योगिक जरूरतों के लिए बैटरी पैक की आपूर्ति बढ़ाना चाहती है। शेयर बाजार को दी गई जानकारी में कंपनी ने इसे प्रस्तावित लिथियम बैटरी पैक सुविधा बताया है।
दो चरणों में बनेगी 10 GWh क्षमता
अलीगढ़ की परियोजना लगभग छह एकड़ क्षेत्र में विकसित करने की योजना है। कंपनी के मुताबिक, निर्माण और क्षमता विस्तार दो चरणों में होगा। प्रत्येक चरण में 5 GWh सालाना क्षमता जोड़ने का प्रस्ताव है। दोनों चरण पूरे होने पर इस स्थान की कुल नियोजित क्षमता 10 GWh होगी।
अलीगढ़ संयंत्र और कंपनी की मौजूदा दुहाई इकाई को मिलाकर कुल क्षमता 12.5 GWh सालाना तक पहुंचाने की योजना बताई गई है। यह दोनों स्थानों का संयुक्त आंकड़ा है। नए अलीगढ़ संयंत्र की अलग क्षमता 10 GWh ही प्रस्तावित है।
चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों तक विस्तार
मैक्सवोल्ट के मौजूदा कारोबार में दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी समाधान शामिल हैं। नई परियोजना के साथ कंपनी चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के बाजार में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वाहन निर्माताओं की जरूरतों के अनुसार समर्पित उत्पादन लाइनें लगाने की योजना भी इस विस्तार का हिस्सा है।
बैटरी पैक का उपयोग केवल वाहनों तक सीमित नहीं रखा गया है। ऊर्जा भंडारण, टेलीकॉम और बिजली के बैकअप से जुड़े समाधान भी प्रस्तावित सुविधा के दायरे में हैं। इन अलग-अलग उपयोगों के लिए ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक बैटरी पैक तैयार किए जाएंगे। वास्तविक आपूर्ति और क्षमता उपयोग की स्थिति संयंत्र के निर्माण तथा उत्पादन शुरू होने के बाद स्पष्ट होगी।
बैटरी पैक और सेल निर्माण में क्या फर्क है?
बैटरी सेल और तैयार बैटरी पैक उत्पादन की अलग-अलग इकाइयां हैं। कई सेल को जोड़कर और उनके संचालन की निगरानी के लिए बैटरी प्रबंधन प्रणाली लगाकर पैक तैयार किया जाता है। मैक्सवोल्ट ने अपनी मौजूदा प्रक्रिया में आयातित सेल के साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली का इस्तेमाल कर पैक तैयार करने की जानकारी दी है।
इसलिए अलीगढ़ की घोषणा को नए बैटरी सेल निर्माण संयंत्र की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए। घोषित परियोजना बैटरी पैक सुविधा की है। इसी तरह ₹700 करोड़ प्रस्तावित निवेश है, जिसे पूरी तरह खर्च हो चुकी राशि नहीं कहा जा सकता।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
इस परियोजना की अगली अहम प्रगति निर्माण कार्य, दोनों चरणों के पूरा होने और वाणिज्यिक आपूर्ति शुरू होने से जुड़ी होगी। घोषित क्षमता भविष्य की योजना बताती है; उससे वर्तमान उत्पादन का निष्कर्ष नहीं निकलता। फिलहाल पुष्ट घटनाक्रम अलीगढ़ में भूमि पूजन और कंपनी की घोषित विस्तार योजना है।



