महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले के निपानी गांव में कुछ किसानों ने कम बारिश और खेत तक पानी नहीं पहुंचने से फसलों पर असर पड़ने की शिकायत की है। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई न मिलने से पशुओं के लिए उगाई गई मक्का भी सूख रही है। किसानों ने प्रशासन से खेतों का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान दर्ज करने और राहत पर निर्णय लेने की मांग की है।
चारे की चिंता के साथ बढ़ा खर्च
गांव के किसान अप्पा बंडू भालेकर के अनुसार उनके पास लगभग 15 एकड़ खेती और करीब 25 पशु हैं। उन्होंने बताया कि चारे के लिए लगाई मक्का पर 30 हजार रुपये से अधिक खर्च हो चुका है, लेकिन पानी की कमी के कारण पौधे कमजोर पड़ रहे हैं। उन्होंने खाद समय पर न मिलने की परेशानी भी बताई। यह स्थिति उनके खेत और पशुधन से जुड़ी है; पूरे जिले में एक जैसी हालत होने का निष्कर्ष इससे नहीं निकलता।
टूटी पाइपलाइन से रुकी सिंचाई
एक अन्य किसान सुभाष पाथड़े ने कहा कि सड़क के काम के दौरान खेत तक पानी पहुंचाने वाली पाइपलाइन टूट गई और सिंचाई बाधित हो गई। उनके मुताबिक कीट का दबाव भी बढ़ा है। उन्होंने प्रति एकड़ लगभग 25 हजार रुपये लागत और करीब पांच लाख रुपये कर्ज होने की बात कही। कर्जमाफी और केवाईसी से जुड़ी उनकी शिकायत पर प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं है।
किसानों की मांग है कि अधिकारी प्रभावित खेतों का पंचनामा करें और जहां सिंचाई व्यवस्था टूट गई है, उसे ठीक करवाएं। सर्वे के बाद ही नुकसान और किसी संभावित मुआवजे का दायरा स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल इस मामले में किसी नई सरकारी सहायता राशि की पुष्टि नहीं हुई है।



