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नोएडा के भूमि अधिग्रहण आंदोलन में भूखंड-मुआवजे की मांग, टिकैत ने दिया समर्थन

नोएडा में किसानों की शांतिपूर्ण सभा का सांकेतिक दृश्य

गौतम बुद्ध नगर में भूमि अधिग्रहण के बाद भूखंड और अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे किसानों की सभाओं में 14 सितंबर को भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत पहुँचे। उन्होंने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से जुड़े प्रदर्शन स्थलों पर किसानों को संगठन के समर्थन का भरोसा दिया और आंदोलन जारी रखने को कहा। यह किसान संगठनों की अपील है; प्राधिकरण की तरफ से मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा नहीं।

तीन प्राधिकरणों से क्या मांग है

प्रदर्शन कर रहे किसान अधिग्रहीत भूमि के बदले 10 प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड, 64 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा, आवासीय भूखंडों के उपयोग में अधिक छूट और गांवों की आबादी भूमि बढ़ाने की मांग उठा रहे हैं। अलग-अलग अधिग्रहण और आवंटन मामलों की पात्रता अलग हो सकती है। इसलिए मांग के ये प्रतिशत प्रत्येक किसान के लिए स्वीकृत अधिकार मानकर आवेदन न करें। अपने प्रकरण का लिखित आदेश और प्राधिकरण की प्रकाशित नीति जाँचें।

टिकैत ने सभा में कहा कि किसान अपनी बात अधिकारियों तक नहीं पहुँचा पा रहे हों तो उन्हें संगठित होकर संघर्ष करना होगा। यह उनका राजनीतिक बयान है। किसानों की ओर से सभा और कार्यालयों के पास धरना जारी रखने की बात कही गई। राष्ट्रीय महासचिव पवन खटाना के अनुसार महापंचायत से पहले गांवों में संपर्क अभियान चलाया गया था।

मुआवजे का फैसला किससे होगा

भूखंड आवंटन और अतिरिक्त रकम का अंतिम निर्णय प्राधिकरण, लागू नियम और व्यक्तिगत दस्तावेज के अनुसार होगा। किसी सभा से पहले जारी वादा अपने आप भुगतान आदेश नहीं बनता। किसान भूमि अधिग्रहण की सूचना, मुआवजा भुगतान रिकॉर्ड, खाता-खसरा और संबंधित पत्र संभालें। नई बातचीत या लिखित आदेश आने पर ही अपने मामले की स्थिति तय करें।