नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के सात साल पूरे होने के बाद जारी सरकारी आँकड़ों में 6 फरवरी 2026 तक 24,96,252 पंजीकरण दर्ज हैं। यह संख्या योजना में जुड़े किसानों की है, अभी पेंशन पा रहे किसानों की संख्या नहीं। पात्र सदस्य को 60 साल की उम्र के बाद कम से कम ₹3,000 मासिक पेंशन का प्रावधान है।
कौन जुड़ सकता है?
यह स्वैच्छिक और अंशदान आधारित योजना छोटे तथा सीमांत भूमिधारी किसानों के लिए है। प्रवेश के समय उम्र 18 से 40 साल होनी चाहिए और खेती योग्य भूमि दो हेक्टेयर तक होनी चाहिए। पात्रता में भूमि रिकॉर्ड और योजना के बहिष्करण नियम भी लागू होते हैं। पहले से कुछ वैधानिक पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के सदस्य, आयकरदाता तथा तय उच्च आर्थिक स्थिति वाली श्रेणियों के लोग इससे बाहर हैं। आवेदन से पहले स्थानीय केंद्र पर अपनी पात्रता जाँचना जरूरी है।
कितना योगदान देना होगा?
किसान का मासिक योगदान जुड़ने की उम्र के अनुसार ₹55 से ₹200 तक है। केंद्र सरकार पेंशन कोष में किसान के बराबर राशि जमा करती है। उदाहरण के लिए, 18 साल की उम्र में जुड़ने वाले सदस्य का हिस्सा ₹55 और 40 साल में जुड़ने वाले का ₹200 प्रति माह है। योगदान संबद्ध बैंक खाते से ऑटो डेबिट के जरिये कटता है। पात्र किसान चाहें तो अपने पीएम-किसान लाभ से योगदान कटवाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। यह पीएम-किसान की ₹6,000 सालाना सहायता से अलग पेंशन योजना है।
परिवार और पंजीकरण की व्यवस्था
पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य की मृत्यु पर, नियमों के अनुसार जीवनसाथी को पेंशन का 50 प्रतिशत, यानी ₹1,500 मासिक पारिवारिक पेंशन मिल सकती है। यह लाभ केवल जीवनसाथी के लिए है, वह भी तब जब वह खुद इसी योजना का लाभार्थी न हो। सदस्य की 60 साल से पहले मृत्यु होने पर जीवनसाथी के लिए योगदान जारी रखने या निकासी नियमों के अनुसार बाहर निकलने का विकल्प है।
पंजीकरण नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर कराया जा सकता है। आधार कार्ड, बैंक खाते का विवरण और मोबाइल नंबर साथ रखने होते हैं। सत्यापन और ऑटो डेबिट की सहमति के बाद पहला योगदान जमा होता है; सफल पंजीकरण पर पेंशन खाता संख्या और कार्ड मिलता है। बैंक खाते से आगे का योगदान स्वतः कटता है।
राज्यों में पंजीकरण
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 11 सितंबर के विवरण के अनुसार, हरियाणा में लगभग 5.75 लाख और बिहार में 3.46 लाख से अधिक किसान जुड़े हैं। झारखंड और उत्तर प्रदेश में प्रत्येक में 2.5 लाख से अधिक पंजीकरण दर्ज हैं। ये आँकड़े फरवरी 2026 तक की स्थिति बताते हैं; नई पात्रता या आवेदन की वर्तमान स्थिति संबंधित सेवा केंद्र से ही पुष्टि करें।



