पावरग्रिड ने राजस्थान की सौर बिजली को आगे पहुँचाने वाली बड़ी पारेषण योजना के लिए बाड़मेर HVDC पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड का अधिग्रहण किया है। 23 सितंबर 2026 को इस परियोजना कंपनी की पूरी हिस्सेदारी REC पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड से पावरग्रिड को हस्तांतरित हुई। संबंधित योजना बाड़मेर क्षेत्र से 6 गीगावाट सौर ऊर्जा की निकासी के लिए है।
इस कदम से परियोजना कंपनी का स्वामित्व बदला है। इसे पारेषण लाइन चालू होने या 6 गीगावाट बिजली की आपूर्ति शुरू होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए। अधिग्रहण और परियोजना का वाणिज्यिक संचालन अलग चरण हैं।
पावरग्रिड को क्या मिला और रकम कितनी है?
REC की 23 सितंबर की सूचना के अनुसार, परियोजना कंपनी के सभी 50,000 इक्विटी शेयर, उससे जुड़ी संपत्तियाँ और देनदारियाँ सफल बोलीदाता को सौंप दी गई हैं। इसी तारीख को शेयर खरीद समझौता हुआ। इसके बाद बाड़मेर HVDC कंपनी REC और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई RECPDCL की सहायक कंपनी नहीं रही।
हस्तांतरण के लिए दर्ज प्रतिफल ₹18,97,52,835, यानी लगभग ₹18.98 करोड़ है। इस रकम में कर, पेशेवर शुल्क और खर्चों की प्रतिपूर्ति शामिल है। यह परियोजना कंपनी के अधिग्रहण की रकम है, पूरे बिजली पारेषण नेटवर्क को बनाने की कुल लागत नहीं। दोनों आँकड़ों को एक मानने से योजना के आकार की गलत तस्वीर बन सकती है।
6 गीगावाट योजना का रास्ता
यह काम राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के चौथे चरण के पाँचवें हिस्से, बाड़मेर कॉम्प्लेक्स, से जुड़ा है। इसका उद्देश्य बाड़मेर-II पर आने वाली सौर बिजली को अंतरराज्यीय पारेषण व्यवस्था के जरिए आगे ले जाना है। 6 गीगावाट क्षमता को मेगावाट में देखें तो यह 6,000 मेगावाट होती है।
योजना में राजस्थान के बाड़मेर-II और महाराष्ट्र के साउथ कलंब के बीच उच्च वोल्टेज डायरेक्ट करंट यानी HVDC व्यवस्था शामिल है। दोनों सिरों पर 6,000 मेगावाट के टर्मिनल और उन्हें जोड़ने वाली ±800 किलोवोल्ट की लाइन इसका प्रमुख भाग हैं। परियोजना में बाड़मेर-II का पूलिंग स्टेशन तथा दूसरे नेटवर्क से जोड़ने वाले पारेषण कार्य भी रखे गए हैं।
सौर उत्पादन के साथ पारेषण क्यों जरूरी?
सौर संयंत्र में बिजली बनना और उसे जरूरत वाले क्षेत्र तक पहुँचाना दो अलग काम हैं। उत्पादन बढ़ने पर उसे आगे ले जाने वाला नेटवर्क भी चाहिए। इस योजना का केंद्र वही पारेषण व्यवस्था है; अधिग्रहण को नया सौर उत्पादन संयंत्र खरीदने की खबर की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
परियोजना कंपनी का चयन शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया से हुआ है। ऐसी व्यवस्था में परियोजना के लिए अलग कंपनी तैयार की जाती है और सफल बोलीदाता उसके जरिए निर्धारित काम आगे बढ़ाता है। यहाँ मिली कंपनी बाड़मेर की इसी विशिष्ट पारेषण योजना से जुड़ी है।
अगला महत्वपूर्ण चरण क्या होगा?
अब आगे की प्रगति समझने के लिए निर्माण, जरूरी अनुमतियों और चालू होने से जुड़ी घोषणाएँ महत्वपूर्ण होंगी। हिस्सेदारी हस्तांतरण का दस्तावेज़ अपने आप परियोजना पूरी होने की पुष्टि नहीं करता। अभी पुष्ट जानकारी कंपनी का अधिग्रहण, उसकी तारीख, हस्तांतरण रकम और संबंधित पारेषण योजना के दायरे तक सीमित है।



