नई दिल्ली, 13 सितंबर 2026: PwC की भारतीय और अमेरिकी इकाइयाँ अपने भारत स्थित सलाहकार कारोबार को एक साझा मंच पर लाने की योजना बना रही हैं। प्रस्तावित संयुक्त इकाई में शुरुआत के समय करीब 40 हजार कर्मचारी होंगे। अमेरिकी फर्म की हिस्सेदारी 50.1 प्रतिशत और भारतीय फर्म की 49.9 प्रतिशत रखने की योजना है, लेकिन रोजमर्रा के संचालन की जिम्मेदारी भारत में रहेगी। योजना अभी नियामकीय मंजूरियों के अधीन है।
प्रस्तावित इकाई में क्या आएगा?
PwC India के अध्यक्ष संजीव कृष्णन के अनुसार, भारतीय फर्म के मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और रिस्क कंसल्टिंग कार्य को PwC US के भारत में चल रहे एक्सेलेरेशन सेंटरों से जोड़ा जाएगा। इससे घरेलू ग्राहकों, विदेशी कंपनियों और भारत में बने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटरों के लिए एक संयुक्त टीम तैयार करने का इरादा है। कृष्णन प्रस्तावित इकाई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी होंगे।
PwC India के ऑडिट, टैक्स और डील्स कारोबार इस व्यवस्था के बाहर रहेंगे। कुछ सरकारी सलाहकारी काम भी नई इकाई में शामिल नहीं किए जाएंगे। इसलिए इसे PwC की सभी सेवाओं के विलय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी के मुताबिक, अमेरिकी एक्सेलेरेशन सेंटरों सहित परिचालन का नेतृत्व भारतीय टीम करेगी, हालांकि प्रस्तावित हिस्सेदारी में अमेरिकी पक्ष मामूली बहुमत रखेगा।
कारोबार के आकार और रोजगार का अनुमान
कृष्णन ने बताया कि PwC India में फिलहाल लगभग 33 हजार लोग काम करते हैं। अमेरिकी इकाई के भारत स्थित सेंटरों को साथ लाने पर प्रस्तावित कंसल्टिंग मंच में करीब 40 हजार कर्मचारी होने का अनुमान है। यह संख्या प्रस्तावित शुरुआत की है, अलग से 40 हजार नई नौकरियाँ पैदा होने की घोषणा नहीं है।
कंपनी के आकलन के अनुसार, मंजूरियाँ मिलने के बाद इस संयोजन से भारत में संबंधित कारोबार का आकार लगभग 1.3 अरब डॉलर से करीब 2 अरब डॉलर हो सकता है। यह भविष्य का अनुमान है, पूरी हो चुकी डील का नतीजा नहीं। कृष्णन ने तीन वर्षों में कारोबार को पाँच गुना करने की महत्वाकांक्षा भी रखी है; इसे तय वृद्धि या वित्तीय पूर्वानुमान नहीं समझना चाहिए।
इस योजना का व्यावसायिक महत्व
बड़ी सलाहकार कंपनियाँ वैश्विक परियोजनाओं के लिए भारत में विशेषज्ञ टीमों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। प्रस्तावित संरचना का मकसद अमेरिकी और भारतीय भागीदारों के बीच काम बाँटने की बाधाएँ कम करना है, ताकि किसी दूसरे देश में मिले प्रोजेक्ट पर भारत से जुड़ी टीम अधिक सीधे ढंग से काम कर सके। PwC US के वरिष्ठ भागीदार और सीईओ पॉल ग्रिग्स ने भी भारत की सलाहकार प्रतिभा और अमेरिकी नेटवर्क की क्षमताओं को एक साथ लाने की योजना की पुष्टि की है।
अभी सबसे अहम अगला कदम नियामकीय समीक्षा है। प्रस्ताव के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग समेत आवश्यक मंजूरियाँ लेनी होंगी। हिस्सेदारी, संचालन और कर्मचारियों के बारे में बताई गई रूपरेखा इसी प्रस्ताव से जुड़ी है; अंतिम स्वीकृति और लागू होने की तारीख स्पष्ट होने पर स्थिति बदलेगी।



