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राइड से पहले अतिरिक्त रकम के दबाव पर कार्रवाई, रैपिडो संचालक पर 10 लाख जुर्माना

मोबाइल पर राइड बुकिंग और हेलमेट का सांकेतिक चित्र

राइड बुक करते समय पहले दिखाए गए किराए से अधिक रकम देने के लिए प्रेरित करने वाले संदेशों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कार्रवाई की है। रैपिडो का संचालन करने वाली रोप्पेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। उपभोक्ता कार्य मंत्रालय की 15 सितंबर की विज्ञप्ति के अनुसार प्राधिकरण ने ऐसे भ्रामक संदेश और संबंधित कार्यप्रणालियाँ बंद करने का निर्देश भी दिया है।

पहले किराया स्वीकार कराया, फिर रकम बढ़ाने का सुझाव

सीसीपीए की जाँच में पाया गया कि ऐप शुरुआत में एक किराया बताता था। उपयोगकर्ता उस रकम पर बुकिंग के लिए सहमत होने के बाद ऐसे संदेश देखता था जिनमें चालक के राइड स्वीकार न करने का कारण बताते हुए अतिरिक्त राशि जोड़ने का सुझाव दिया जाता था। प्राधिकरण के मुताबिक इससे अधिक भुगतान को जल्दी राइड मिलने से जोड़ने वाली धारणा बनती थी।

प्राधिकरण ने इसे उपयोगकर्ता पर दबाव डालने वाला डिजाइन माना। उसके अनुसार बुकिंग के उस चरण में व्यक्ति सेवा पाने के लिए ऐप पर निर्भर होता है और विकल्पों पर निर्णय लेने की उसकी गुंजाइश सीमित हो सकती है। सीसीपीए ने इसे डार्क पैटर्न की “कन्फर्म शेमिंग” श्रेणी में रखा है।

रंग और स्लाइडर के डिजाइन पर भी आपत्ति

मंत्रालय ने बताया कि अपनी कीमत चुनने वाले स्लाइडर में राशि बढ़ाने पर हरे रंग का संकेत और घटाने पर लाल या नारंगी चेतावनी दिखाई जाती थी। रकम ऊपर ले जाने के लिए उपलब्ध गुंजाइश भी घटाने की तुलना में अधिक थी। सीसीपीए के निष्कर्ष में यह इंटरफेस उपयोगकर्ता को ज्यादा भुगतान की ओर मोड़ता था, जिसे उसने “इंटरफेस इंटरफेरेंस” कहा।

कंपनी की दलील क्या थी

विज्ञप्ति में रैपिडो का पक्ष भी दर्ज है। कंपनी ने कहा था कि अतिरिक्त भुगतान स्वैच्छिक है और उसे देने या न देने पर भी राइड मिलाने वाला एल्गोरिदम काम करता रहता है। उसने संदेशों को चालक और सवारी के बीच वास्तविक समय की बातचीत जैसा बताया था।

प्राधिकरण ने यह दलील स्वीकार नहीं की। उसका कहना था कि संदेशों का समय और स्वरूप उपयोगकर्ता पर दबाव बनाते हैं। सीसीपीए के अनुसार कंपनी ने रिकॉर्ड पर ऐसा आँकड़ा नहीं दिया जिससे यह साबित हो कि अतिरिक्त रकम से राइड मिलने की संभावना वास्तव में बढ़ती है।

टिप और सेवा की शर्त अलग हैं

सीसीपीए ने कहा कि टिप सामान्यतः सेवा मिलने के बाद स्वेच्छा से दिया जाने वाला भुगतान है। उसे सेवा उपलब्ध कराने की शर्त की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने मोटर वाहन एग्रीगेटर दिशानिर्देश, 2025 के संदर्भ में भी राइड पूरी होने के बाद ही टिप की सुविधा दिए जाने का उल्लेख किया है।

यह कार्रवाई कैब और बाइक-टैक्सी ऐपों की व्यापक जाँच का हिस्सा है। विज्ञप्ति के अनुसार उबर और ओला की जाँच जारी है; उनके मामले में यहाँ किसी अंतिम दंड का निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार व्यवहार या डार्क पैटर्न से जुड़ी शिकायत के लिए उपभोक्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के 1915 नंबर का उपयोग कर सकते हैं। रैपिडो संबंधी अंतिम आदेश सीसीपीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध बताया गया है।