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RBI ने आजमगढ़ के जिला सहकारी बैंक पर ₹1.15 लाख जुर्माना लगाया

RBI ने उत्तर प्रदेश के जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, आजमगढ़ पर ₹1.15 लाख की पेनाल्टी लगाई है। कार्रवाई कर्जदारों की क्रेडिट जानकारी भेजने और ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर दर्ज करने में नियमों के उल्लंघन पर हुई है। आदेश 9 सितंबर 2026 का है, जबकि इसकी जानकारी 10 सितंबर को जारी की गई। इस […]

RBI पेनाल्टी का सांकेतिक AI चित्र: सहकारी बैंक, KYC फाइल और अनुपालन का तराजू

RBI ने उत्तर प्रदेश के जिला सहकारी बैंक लिमिटेड, आजमगढ़ पर ₹1.15 लाख की पेनाल्टी लगाई है। कार्रवाई कर्जदारों की क्रेडिट जानकारी भेजने और ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर दर्ज करने में नियमों के उल्लंघन पर हुई है। आदेश 9 सितंबर 2026 का है, जबकि इसकी जानकारी 10 सितंबर को जारी की गई।

RBI को क्रेडिट रिपोर्टिंग और KYC में खामियाँ मिलीं

रिजर्व बैंक के अनुसार, बैंक अपने कर्जदारों की क्रेडिट जानकारी सभी क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनियों तक नहीं पहुँचा पाया। दूसरी कमी यह थी कि ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समय के भीतर सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री, यानी CKYCR पर अपलोड नहीं किए गए।

ये दो अलग प्रक्रियाएँ हैं। क्रेडिट रिपोर्टिंग का संबंध उधार लेने वालों की ऋण संबंधी जानकारी से है। KYC प्रक्रिया ग्राहक की पहचान और संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखने से जुड़ी है। इसलिए इस मामले को केवल एक सामान्य कागजी गलती कहकर समझना अधूरा होगा; कार्रवाई दोनों तरह के नियामकीय अनुपालन से संबंधित है।

नाबार्ड के निरीक्षण के बाद नोटिस

इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में नाबार्ड का वैधानिक निरीक्षण है। निरीक्षण में बैंक की 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति को आधार बनाया गया था। सामने आई कमियों और संबंधित पत्राचार के बाद रिजर्व बैंक ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। बैंक से पूछा गया कि निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए उस पर पेनाल्टी क्यों न लगाई जाए।

फैसले से पहले बैंक के लिखित जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई में रखी गई मौखिक दलीलों पर विचार किया गया। इसके बाद RBI ने दोनों आरोपों को पेनाल्टी लगाने के लिए पर्याप्त पाया। कार्रवाई में क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनीज (रेगुलेशन) अधिनियम, 2005 और बैंकिंग रेगुलेशन अधिनियम, 1949 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल हुआ है।

लेनदेन की वैधता पर फैसला नहीं

रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कदम नियामकीय अनुपालन की कमियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय देना नहीं है। इस सीमा को समझना जरूरी है: पेनाल्टी की खबर को अपने आप में किसी खास खाते या ऋण समझौते को अमान्य घोषित करने वाला आदेश नहीं माना जा सकता।

विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि पेनाल्टी अन्य संभावित कार्रवाई के रास्ते को बंद नहीं करती। हालांकि इस विज्ञप्ति से आगे की किसी निश्चित कार्रवाई का निष्कर्ष भी नहीं निकाला जाना चाहिए। फिलहाल पुष्ट तथ्य बैंक पर लगी ₹1.15 लाख की पेनाल्टी और उससे जुड़े दो अनुपालन उल्लंघन हैं।

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