پورا بھارت · اردو
▤   پورا بھارتدیش کی آوازمکمل تصویرقومی ایڈیشن
⌖ پورا بھارت

RCF का थाल प्लांट सुधरेगा: L&T को ₹797 करोड़ का आदेश देने की मंजूरी

RCF थाल प्लांट की खबर के लिए रासायनिक संयंत्र का सांकेतिक चित्र

RCF थाल प्लांट की ऊर्जा खपत घटाने की परियोजना को बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड ने लार्सन एंड टुब्रो को ₹797 करोड़ का खरीद आदेश देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। इस रकम पर टैक्स अलग से जुड़ेंगे। योजना मौजूदा अमोनिया संयंत्र के सुधार और आधुनिकीकरण से संबंधित है।

कंपनी ने 25 सितंबर 2026 की शाम एक्सचेंज को यह जानकारी दी। बोर्ड ने उसी दिन हुई बैठक में सबसे कम निविदा बोली के आधार पर L&T को काम देने की स्वीकृति दी। फाइलिंग में परियोजना से जुड़ी अवधि 36 महीने बताई गई है। यह फैसला काम पूरा होने या संयंत्र के नए स्वरूप में चालू हो जाने की घोषणा नहीं है।

RCF थाल प्लांट में कौन से काम होंगे

प्रस्तावित खरीद आदेश का दायरा केवल उपकरण पहुँचाने तक सीमित नहीं है। इसमें विस्तृत इंजीनियरिंग, निर्माण के लिए उपकरणों का विनिर्माण, सप्लाई, साइट पर निर्माण, उपकरण स्थापित करना, कमीशनिंग और गारंटी रन शामिल हैं। इन चरणों के जरिए संयंत्र में आवश्यक तकनीकी बदलाव किए जाने हैं।

कंपनी ने उद्देश्य के रूप में स्पेसिफिक एनर्जी कंजम्पशन में कमी का उल्लेख किया है। सरल अर्थ में यह उत्पादन की एक इकाई के लिए इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा से जुड़ा माप है। हालांकि, फाइलिंग में संभावित कमी का प्रतिशत, सालाना रुपये में बचत या निवेश की लागत वापस आने की अवधि नहीं बताई गई है। इसलिए अभी किसी निश्चित बचत का आंकड़ा निकालना उचित नहीं होगा।

₹797 करोड़ में टैक्स शामिल नहीं

मुख्य बिंदु कंपनी का खुलासा
परियोजना थाल अमोनिया संयंत्र का रिवैम्प
काम देने वाली कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स
चयनित कंपनी लार्सन एंड टुब्रो
आदेश का मूल्य ₹797 करोड़, टैक्स अतिरिक्त
चयन का आधार सबसे कम निविदा बोली
परियोजना की अवधि 36 महीने
बोर्ड की स्वीकृति 25 सितंबर 2026

RCF ने चयनित पक्ष को घरेलू इकाई बताया है। फाइलिंग में यह भी कहा गया है कि यह संबंधित पक्ष का लेनदेन नहीं है। प्रमोटर या समूह की चयनित इकाई में दिलचस्पी संबंधी सवाल को कंपनी ने लागू नहीं बताया है। ये जानकारी लेनदेन की प्रकृति स्पष्ट करती हैं; इनसे भविष्य के वित्तीय परिणामों का अनुमान नहीं निकलता।

मंजूरी के बाद अब क्रियान्वयन पर नजर

बोर्ड की बैठक शाम 5:30 बजे शुरू हुई और 7:20 बजे समाप्त हुई। उसके बाद कंपनी ने निर्णय सार्वजनिक किया। परियोजना के आगे बढ़ने पर इंजीनियरिंग, उपकरणों की आपूर्ति, साइट पर स्थापना और परीक्षण जैसे चरण महत्वपूर्ण होंगे। घोषित 36 महीने की अवधि इसी काम से जुड़ी है; उपलब्ध सूचना में अलग से कोई निश्चित कैलेंडर तारीख नहीं दी गई है।

निवेशकों के लिए ₹797 करोड़ का अर्थ आदेश का वाणिज्यिक आकार है, तत्काल मुनाफा नहीं। RCF की ओर से यह संयंत्र सुधार का खर्च है और L&T की ओर से परियोजना का काम। वास्तविक आय, लागत तथा बचत का असर निष्पादन और आगे के खुलासों से स्पष्ट होगा। अभी पुष्टि बोर्ड की स्वीकृति, काम के दायरे, मूल्य और समयसीमा की हुई है।