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CAS पर सेबी का नया मसौदा: डेरिवेटिव्स निपटान और बाजार बंद होने का समय बदल सकता है

SEBI की CAS समीक्षा और शेयर बाजार के खरीद-बिक्री ऑर्डर का सांकेतिक दृश्य

12 सितंबर 2026 का अपडेट: शेयर बाजार बंद होने से ठीक पहले की नीलामी, यानी Closing Auction Session (CAS), पर सेबी ने नया परामर्श पत्र जारी किया है। इसमें एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स का निपटान मूल्य, सामान्य कारोबार और नीलामी का समय, तथा नीलामी के दौरान दिखने वाले संकेतक भाव की समीक्षा के विकल्प रखे गए हैं। ये प्रस्ताव हैं, लागू हो चुके नियम नहीं। बाजार भागीदार 3 अक्टूबर तक अपनी राय दे सकते हैं।

इस बदलाव को समझने के लिए दो कीमतें अलग रखना जरूरी है। एक शेयर का दिन के अंत का अंतिम भाव है, जो नीलामी में खरीद-बिक्री के ऑर्डर मिलाकर निकलता है। दूसरी कीमत एक्सपायर हो रहे फ्यूचर्स और ऑप्शंस के निपटान के लिए तय होती है। सेबी की नई चर्चा मुख्य रूप से इन दोनों के तालमेल और आखिरी मिनटों में आने वाले तेज उतार-चढ़ाव पर है।

एक्सपायरी का निपटान मूल्य कैसे तय हो सकता है?

पहले विकल्प में सामान्य ट्रेडिंग सत्र (CTS) के आखिरी 30 मिनट और CAS के 10 मिनट में हुए वास्तविक सौदों को साथ लेकर मात्रा-भारित औसत, यानी blended VWAP, निकाला जाएगा। इन दोनों अवधियों को कोई पहले से तय प्रतिशत नहीं मिलेगा; जितने मूल्य का कारोबार जिस हिस्से में हुआ, उसी के आधार पर उसका योगदान तय होगा। यह विकल्प इंडेक्स और एकल शेयर, दोनों के डेरिवेटिव्स के लिए रखा गया है।

दूसरा विकल्प फिलहाल केवल CTS के अंतिम 30 मिनट के VWAP से निपटान मूल्य तय करने का है। CAS के सौदे तब गणना में नहीं आएँगे। इस पद्धति का अनुभव होने के कम-से-कम एक साल बाद नीलामी के सौदों को भी जोड़ने पर विचार हो सकता है; बदलाव अपने-आप लागू नहीं होगा। अंतिम रास्ता सार्वजनिक प्रतिक्रिया और नियामक के अगले फैसले से तय होगा।

कारोबार बंद होने के समय के दो विकल्प

एक प्रस्ताव में CAS वाले शेयरों का नियमित कारोबार 3:30 बजे तक, करीब 3:31 से 3:40 बजे तक नीलामी और डेरिवेटिव्स कारोबार 3:45 बजे तक चलेगा। दूसरे में नियमित कारोबार 3:15 बजे तक रहेगा, CAS लगभग 3:15 से 3:25 बजे तक होगा और डेरिवेटिव्स 3:30 बजे बंद होंगे। ये दोनों समय-सारिणियाँ विचाराधीन हैं; सोमवार के लिए इन्हें नई घोषित ट्रेडिंग टाइमिंग नहीं समझना चाहिए। सेबी ने नियमित सत्र और नीलामी के बीच अंतराल घटाने तथा नीलामी के बाद डेरिवेटिव्स की खिड़की को पाँच मिनट करने पर भी राय मांगी है।

स्क्रीन पर दिखने वाला भाव अंतिम सौदा नहीं

नीलामी चलने के दौरान किसी शेयर का indicative equilibrium price (IEP) नए ऑर्डर आने या बदलने से आगे-पीछे हो सकता है। इस संकेतक स्तर पर जरूरी नहीं कि कोई सौदा हुआ हो। इसी वजह से संकेतक शेयर भावों से बनता दिख रहा इंडेक्स स्तर भी वास्तविक ट्रेडेड इंडेक्स स्तर से अलग है। परामर्श पत्र में शेयर-स्तर का IEP दिखाते रहने, लेकिन CAS के दौरान उससे निकले संकेतक इंडेक्स मूल्य का प्रसारण रोकने का प्रस्ताव है।

ऑर्डर संबंधी प्रस्ताव में CAS का मौजूदा लगभग तीन प्रतिशत का मूल्य-दायरा बना रहेगा। संदर्भ भाव से एक प्रतिशत से अधिक दूर रखे कुछ लिमिट ऑर्डरों को बाद में रद्द करने पर रोक और बचे हुए iceberg ऑर्डरों की मात्रा नीलामी में खुले लिमिट ऑर्डर के रूप में भेजने पर भी राय मांगी गई है। इन बिंदुओं का उद्देश्य नीलामी में मौजूद खरीद-बिक्री की वास्तविक दिलचस्पी को स्पष्ट करना है।

CAS शेयरों का समापन भाव खोजने के लिए 3 अगस्त से शुरू हुआ था। सितंबर के प्रारंभ में सेबी ने एक्सपायरी के निपटान मूल्य की पद्धति पर पुनर्विचार की बात कही और 10 सितंबर को अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने CAS जारी रहने का संकेत दिया था। अब औपचारिक मसौदा आने से चर्चा के ठोस विकल्प सामने हैं। निवेशक और ट्रेडर अंतिम परिपत्र आने तक अपने सौदों के लिए वर्तमान एक्सचेंज नियम और वास्तविक समय-सीमा ही देखें।