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नवीनीकरण शुल्क बाकी: रेलिगेयर कैपिटल समेत 12 रिसर्च एनालिस्ट के पंजीकरण रद्द

रिसर्च एनालिस्ट पंजीकरण की जाँच का सांकेतिक चित्र

रिसर्च एनालिस्ट पंजीकरण के नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं करने पर सेबी ने 12 व्यक्तियों और संस्थाओं के प्रमाणपत्र रद्द कर दिए हैं। इनमें रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड भी शामिल है। 23 सितंबर 2026 को मुंबई में जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू है। कार्रवाई रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर मिले इन पंजीकरणों से संबंधित है।

आदेश का एक अहम पहलू यह है कि सभी पक्षों की प्रतिक्रिया समान नहीं थी। पहले आठ पक्षों की ओर से तय समय में जवाब नहीं मिला। बाकी चार ने अपने जवाब में पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध किया था। नियामक ने पाया कि किसी भी पक्ष ने नवीनीकरण शुल्क का भुगतान नहीं होने के तथ्य को खारिज करने वाला दस्तावेजी प्रमाण पेश नहीं किया।

रिसर्च एनालिस्ट पंजीकरण क्यों रद्द हुआ

आदेश में उद्धृत नियम के तहत पंजीकरण को प्रभावी बनाए रखने के लिए हर पाँच वर्ष में शुल्क देना होता है। जिस अवधि के लिए भुगतान किया गया हो, उसके समाप्त होने से पहले के तीन महीनों में अगला शुल्क जमा करने का प्रावधान है। इन मामलों में भुगतान बाकी रहने की तारीखें मई 2024 से नवंबर 2025 के बीच थीं।

सेबी ने फरवरी 2025, मई 2026 और अगस्त 2026 में संबंधित पक्षों को नोटिस भेजे थे। उनसे दस्तावेजों के साथ 21 दिनों में लिखित जवाब माँगा गया कि उनका प्रमाणपत्र रद्द या निलंबित क्यों नहीं किया जाना चाहिए। आदेश के अनुसार नोटिस विधिवत पहुँचाए गए थे। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर संक्षिप्त कार्यवाही पूरी की गई।

किन 12 नामों के प्रमाणपत्र रद्द हुए

  • डॉ. स्टॉक रिसर्च एडवाइजरी
  • एस्पिरिटो सैंटो सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
  • इंडीड रिसर्च
  • मितेश ठक्कर
  • नितिन गामी
  • राहुल लाला, ग्रीनटिक्स रिसर्च के प्रोपराइटर
  • सुनील कुमार धवाला
  • डब्ल्यूएसए इक्विटी एंड फाइनेंशियल रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड
  • रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड
  • रवि किरण कुलकर्णी
  • इंडियानिवेश सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड
  • मैग्नम कैपिटल एडवाइजर्स

इनमें रेलिगेयर कैपिटल मार्केट्स, रवि किरण कुलकर्णी, इंडियानिवेश सिक्योरिटीज और मैग्नम कैपिटल एडवाइजर्स ने जवाब देकर पंजीकरण रद्द करने का अनुरोध किया था। शेष आठ के संबंध में आदेश में जवाब नहीं मिलने का उल्लेख है। इसलिए इस कार्रवाई को सभी पक्षों की ओर से एक जैसा जवाब दिए जाने के रूप में पढ़ना सही नहीं होगा।

पुराने ग्राहकों के प्रति जिम्मेदारी बनी रहेगी

प्रमाणपत्र रद्द होने से पहले किए गए काम या किसी आवश्यक काम को नहीं करने की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। सेबी ने रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने, निवेशकों की शिकायतें सुलझाने तथा ग्राहकों के रिकॉर्ड, धन या प्रतिभूतियों के हस्तांतरण की व्यवस्था करने को कहा है। ग्राहकों की सेवा की निरंतरता और लंबित कार्रवाई या चूक के संबंध में जरूरी कदम भी उठाने होंगे।

नियामक ने कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल से अनजान निवेशकों को बचाना बताया है, जो अब प्रभावी नहीं हैं। आदेश की प्रति संबंधित पक्षों और रिसर्च एनालिस्ट प्रशासन तथा निगरानी निकाय के रूप में बीएसई को भेजने का निर्देश है। निर्णय मुख्य महाप्रबंधक सोमा मजूमदार ने जारी किया है।