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बीज विधेयक पर किसान संगठनों से चर्चा, पारंपरिक बीजों की सुरक्षा का भरोसा

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026। प्रस्तावित बीज विधेयक पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों पर किसानों के अधिकार सुरक्षित रखे जाएंगे। विधेयक को अंतिम रूप देने की समयसीमा अभी तय नहीं है। बीज विधेयक पर […]

बीज विधेयक पर किसानों के संवाद का AI निर्मित सांकेतिक दृश्य

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026। प्रस्तावित बीज विधेयक पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि भवन में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक और कृषक किस्मों के बीजों पर किसानों के अधिकार सुरक्षित रखे जाएंगे। विधेयक को अंतिम रूप देने की समयसीमा अभी तय नहीं है।

बीज विधेयक पर किसानों की मुख्य चिंता

चौहान के अनुसार किसान अपने पारंपरिक बीज इस्तेमाल, साझा और बेच सकेंगे; इनके पंजीकरण की अनिवार्यता नहीं होगी। अपनी जरूरत, गांव में वितरण या कंपनी के लिए बीज उत्पादन करने वाले किसान पर डिजिटल पंजीकरण का अनिवार्य बोझ नहीं डालने की बात भी उन्होंने कही। ये प्रस्तावित व्यवस्था के बारे में मंत्री के बयान हैं।

सुझावों पर आगे भी विचार

मंत्री ने बताया कि नवंबर–दिसंबर 2025 में करीब 18 हजार सुझाव मिले थे। गुरुवार की चर्चा में लगभग 20 संगठनों ने विचार रखे। उन्होंने करीब 70 फीसदी बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर होने की बात कही। किसान संगठनों और दूसरे हितधारकों से संवाद आगे जारी रहेगा।

गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर

बैठक से पहले कृषि मंत्रालय ने नकली, मिलावटी और अमानक बीज बेचने वाली कंपनियों तथा कारोबारियों के खिलाफ सख्त प्रावधान तैयार करने का उद्देश्य बताया था। इनमें भारी जुर्माने और जेल जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार बीज की पहचान और उसकी आपूर्ति श्रृंखला का रिकॉर्ड बेहतर बनाना चाहती है, ताकि खराब बीज मिलने पर जिम्मेदारी तय करने में मदद मिले।

इस परामर्श की घोषणा 9 सितंबर को हुई थी। मंत्रालय ने किसान प्रतिनिधियों के जमीनी अनुभव और चिंताएं मसौदे में शामिल करने की बात रखी थी। अब चर्चा आगे बढ़ी है, लेकिन प्रस्तावित प्रावधानों को लागू कानून मानना सही नहीं होगा।