پورا بھارت · اردو
▤   پورا بھارتدیش کی آوازمکمل تصویرقومی ایڈیشن
⌖ پورا بھارت

बक्सर संयंत्र की दूसरी 660 मेगावाट इकाई चालू, बिहार के लिए बिजली क्षमता बढ़ी

बक्सर ताप विद्युत परियोजना की दूसरी इकाई का सांकेतिक दृश्य

बिहार के बक्सर जिले में एसजेवीएन की ताप विद्युत परियोजना ने एक अहम चरण पूरा किया है। कंपनी की एक्सचेंज को दी सूचना के अनुसार, चौसा स्थित संयंत्र की दूसरी 660 मेगावाट इकाई का व्यावसायिक संचालन 12 सितंबर 2026 को रात 12 बजे से निर्धारित किया गया। इस इकाई के जुड़ने से 1,320 मेगावाट की परियोजना की दोनों इकाइयाँ व्यावसायिक संचालन के दायरे में आ गई हैं।

यह खबर केवल शेयर के भाव से जुड़ी नहीं है। नई क्षमता का असर बिजली की उपलब्धता, बिहार को आवंटित आपूर्ति और संयंत्र से कंपनी की भविष्य की आय पर पड़ेगा। हालांकि किसी इकाई का संचालन शुरू होना और उसका हर समय पूरी क्षमता पर बिजली बनाना अलग बातें हैं; वास्तविक उत्पादन ईंधन, रखरखाव और बिजली की मांग पर निर्भर करेगा।

पहली इकाई के बाद दूसरा चरण

बक्सर परियोजना में 660-660 मेगावाट की दो इकाइयाँ हैं। पहली इकाई नवंबर 2025 में व्यावसायिक संचालन तक पहुँच चुकी थी। दूसरी इकाई के लिए 31 अगस्त 2026 को 72 घंटे का परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने की जानकारी कंपनी ने दी थी। उसके बाद 12 सितंबर की मध्यरात्रि से व्यावसायिक संचालन की तारीख तय की गई। परियोजना को एसजेवीएन की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एसजेवीएन थर्मल प्राइवेट लिमिटेड विकसित कर रही है।

बिहार को कितना हिस्सा मिलेगा

कंपनी के परियोजना विवरण के मुताबिक उत्पादन का 85 प्रतिशत हिस्सा बिहार के लिए दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते के अंतर्गत तय है। इससे राज्य को उपलब्ध निर्धारित उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बाकी बिजली के उपयोग और वास्तविक आपूर्ति का हिसाब परिचालन तथा लागू समझौतों के अनुसार तय होगा।

पूरी परियोजना का अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 9,828 मिलियन यूनिट बताया गया है। यह संयंत्र की नियोजित क्षमता से जुड़ा अनुमान है, किसी खास वर्ष में मिलने वाली बिजली का निश्चित वादा नहीं। स्थानीय आपूर्ति पर वास्तविक असर समझने के लिए आने वाले महीनों के उत्पादन और वितरण आँकड़े देखना जरूरी होगा।

परियोजना की तकनीक और अगला सवाल

चौसा का यह कोयला आधारित संयंत्र सुपरक्रिटिकल तकनीक पर बनाया गया है। परंपरागत ताप बिजली इकाइयों की तुलना में ऐसी तकनीक ईंधन के इस्तेमाल की दक्षता बेहतर कर सकती है। फिर भी पर्यावरणीय प्रभाव, उत्सर्जन नियंत्रण और कोयले की नियमित उपलब्धता इसके परिचालन के महत्वपूर्ण पहलू बने रहेंगे। कंपनी की आधिकारिक परियोजना जानकारी में कोयले के लिए दीर्घकालीन लिंक और पानी के स्रोत के रूप में गंगा नदी का उल्लेख है।

निवेशकों के लिए भी अगला ठोस संकेत शेयर का पिछला ऊँचा या नीचा भाव नहीं, बल्कि नई इकाई से मिलने वाला वास्तविक उत्पादन, बिजली बिक्री और वित्तीय नतीजों में उसका योगदान होगा। शनिवार को भारतीय शेयर बाजार बंद है, इसलिए शुक्रवार के बंद भाव को आज के लाइव कारोबार के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए। कंपनी के आगे के परिचालन आँकड़े सामने आने पर ही इस क्षमता विस्तार का पूरा असर स्पष्ट होगा।