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शादी और मातृत्व के बाद काम पाना कठिन था, सोनी राजदान ने साझा किया संघर्ष

मुंबई: अभिनेत्री सोनी राजदान ने अपने करियर के उस दौर को याद किया है जब शादी और मां बनने के बाद उन्हें सार्थक भूमिकाएं मिलना कठिन हो गया था। उनका कहना है कि उस समय फिल्म उद्योग में विवाहित अभिनेत्रियों के प्रति नजरिया आज की तुलना में काफी अलग था और काम जारी रखने की इच्छा को भी कई बार सवालों के घेरे में रखा जाता था।

एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान सोनी ने बताया कि शादी के बाद लोगों की प्रतिक्रिया अक्सर यह होती थी कि अब उन्हें काम करने की क्या जरूरत है। मां बनने के बाद यह चुनौती और बढ़ गई। उनके मुताबिक, अच्छी भूमिका के लिए प्रयास करना एक लंबी लड़ाई जैसा था। उन्होंने कहा कि आज परिस्थितियों में बदलाव देखकर उन्हें खुशी होती है और उनकी बेटी आलिया भट्ट जैसी अभिनेत्रियां विवाह तथा मातृत्व के बाद भी अपने करियर को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा पा रही हैं।

सोनी ने अपने पति और फिल्मकार महेश भट्ट से जुड़ा एक दिलचस्प अनुभव भी सुनाया। उन्होंने कहा कि महेश उन्हें जिन किरदारों की पेशकश करते थे, उनमें अक्सर उनका पात्र कहानी में मर जाता था। घर के बच्चों ने भी इस समानता पर ध्यान दिया था और मजाक में पूछते थे कि पिता हर फिल्म में मां के किरदार को क्यों खत्म कर देते हैं।

उन्होंने बताया कि जब बाद में महेश भट्ट ने एक और छोटा किरदार प्रस्तावित किया तो उन्होंने पहले ही पूछ लिया कि कितने दृश्य हैं और क्या पात्र फिर मर जाएगा। जवाब मिलने पर उन्होंने वह भूमिका स्वीकार नहीं की। इस प्रसंग को उन्होंने हंसी के साथ साझा किया, लेकिन इसके पीछे उस समय महिला कलाकारों के लिए उपलब्ध सीमित अवसरों का गंभीर पक्ष भी सामने आया।

सोनी राजदान ने कुछ निर्माताओं और रचनात्मक टीमों को श्रेय दिया, जिन्होंने कठिन दौर में उन्हें मजबूत और पूरे आकार वाली भूमिकाएं दीं। उनका मानना है कि फिल्म उद्योग में धीरे-धीरे बदलाव आया है और अब महिला कलाकारों की निजी जिंदगी को उनके पेशेवर भविष्य का अंत मानने वाली सोच कमजोर हुई है।

सोनी की बातें हिंदी सिनेमा में महिला कलाकारों के बदलते सफर की ओर इशारा करती हैं। पहले विवाह या मातृत्व के बाद मुख्य भूमिकाओं से दूरी सामान्य मानी जाती थी, जबकि अब कई अभिनेत्रियां पारिवारिक जीवन के साथ लगातार फिल्मों और श्रृंखलाओं में प्रमुख काम कर रही हैं। फिर भी अवसरों की बराबरी, उम्र के साथ मिलने वाली भूमिकाओं और कामकाजी माताओं के लिए सहज माहौल जैसे सवाल अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।