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सुल्तानपुर से लखनऊ तक अस्पतालों में भटकने के बाद नवजात की मौत: हाईकोर्ट ने 15 दिन में जांच मांगी

सुल्तानपुर में जन्मे एक नवजात की गंभीर हालत में लखनऊ के कई सरकारी अस्पतालों में ले जाए जाने के बाद मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार को निष्पक्ष जांच कराने का निर्देश दिया है। सरकार को 15 दिन में जांच रिपोर्ट दाखिल करनी होगी और परिवार का पक्ष भी दर्ज करना होगा।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार बच्चे को तत्काल विशेषज्ञ इलाज की जरूरत थी। उसे सुल्तानपुर से सामान्य एम्बुलेंस में लखनऊ लाया गया और परिजन केजीएमयू, राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान तथा एसजीपीजीआई गए। विभिन्न संस्थानों में बेड या जरूरी सुविधा उपलब्ध न होने के बीच जन्म के 24 घंटे के भीतर बच्चे की मौत हो गई।

केजीएमयू और परिवार ने घटनाक्रम के बारे में अलग-अलग विवरण दिए हैं। अदालत ने अभी किसी डॉक्टर या अस्पताल की लापरवाही पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। पीठ ने कहा कि जांच में उपचार या सुविधा उपलब्ध कराने में कमी सामने आती है तो जवाबदेही और परिवार को मुआवजे के प्रश्न पर विचार किया जाएगा।

हाईकोर्ट ने सरकार से नए मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटर, विशेषज्ञ सेवाएँ और जरूरी बुनियादी सुविधाएँ बढ़ाने की समयबद्ध कार्ययोजना भी माँगी है। गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले अगले अस्पताल में बेड और सुविधा की उपलब्धता जाँचने वाली व्यवस्था तथा अस्पतालों में परिवारों को मार्गदर्शन देने वाले कर्मियों की जरूरत पर भी जोर दिया गया। अगली सुनवाई एक अक्टूबर को तय है।