यूपीआई भुगतान पर शुल्क की चर्चा के बीच वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को पैसा भेजने या उससे प्राप्त करने पर ग्राहकों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। मंत्रालय की 15 सितंबर की विज्ञप्ति के अनुसार नए ढाँचे में मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर चुनिंदा व्यापारी भुगतानों से संबंधित है। इसे यूपीआई इस्तेमाल करने वाले हर ग्राहक पर लगने वाला शुल्क बताना गलत होगा।
ग्राहक और व्यापारी के शुल्क में अंतर
मंत्रालय का कहना है कि एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि व्यापारी इसका भार ग्राहकों पर न डालें। यूपीआई ऐप प्रदाताओं के लिए प्लेटफॉर्म या छिपे शुल्क लगाने पर भी रोक बताई गई है। एमडीआर भुगतान व्यवस्था चलाने वाले बैंकों और सेवा प्रदाताओं के बीच बाँटा जाता है; मंत्रालय ने इसे सरकारी कर या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला शुल्क नहीं बताया है।
कौन-से भुगतान निःशुल्क रहेंगे
व्यक्ति से व्यक्ति को होने वाले सभी यूपीआई हस्तांतरण मुफ्त रहेंगे। व्यापारी को 2,000 रुपये तक के भुगतान पर भी एमडीआर नहीं लगेगा। इसके अलावा पी2पीएम श्रेणी में आने वाले छोटे व्यापारियों को, जो यूपीआई क्यूआर के जरिए महीने में एक लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, सभी लेन-देन पर शून्य एमडीआर का लाभ जारी रहेगा।
मंत्रालय के आकलन के मुताबिक करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन इन छूटों के कारण अप्रभावित रहेंगे। यह आँकड़ा लेन-देन के अनुपात का है; इसे व्यापारियों की संख्या या कुल भुगतान राशि का 96 प्रतिशत नहीं समझना चाहिए।
निर्दिष्ट व्यापारी भुगतानों की दरें
विज्ञप्ति में छूट से बाहर 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर बताया गया है। 75,000 रुपये और उससे अधिक के भुगतान के लिए इसकी सीमा प्रति लेन-देन 300 रुपये रहेगी। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे आवश्यक या कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर पाँच रुपये की समान दर बताई गई है।
म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकर और डीलरों से संबंधित पूंजी बाजार भुगतान के लिए दर 0.02 प्रतिशत तथा अधिकतम सीमा 300 रुपये बताई गई है। ये व्यापारी भुगतान व्यवस्था की दरें हैं; इन्हें ग्राहक से सीधे इतनी राशि काटे जाने की घोषणा के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
मुफ्त इस्तेमाल का मतलब असीमित राशि भेजना नहीं
मंत्रालय ने मुफ्त उपयोग के लिए मासिक कोटा नहीं होने की बात कही है। लेकिन बैंक और एनपीसीआई की सुरक्षा संबंधी दैनिक लेन-देन सीमाएँ अलग से लागू रहती हैं। भुगतान की सीमा और शुल्क की सीमा दो अलग व्यवस्थाएँ हैं।
छोटे कारोबारों में यूपीआई अपनाने को बढ़ावा देने के लिए कुल एमडीआर संग्रह के पाँच प्रतिशत के बराबर राशि वाला कोष स्थापित करने की भी बात कही गई है। इस विज्ञप्ति में अलग से प्रभावी होने की तारीख नहीं बताई गई है; यहाँ दी गई दरें मंत्रालय द्वारा स्पष्ट किए गए ढाँचे का विवरण हैं।

