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तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव में वॉल स्ट्रीट फिसला, निवेशकों की नजर फेड पर

तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव में वैश्विक शेयर बाजार की गिरावट का सांकेतिक दृश्य

वॉल स्ट्रीट में गिरावट के साथ अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंचना और अगस्त की थोक महंगाई के मजबूत आंकड़ों ने जोखिम लेने की धारणा को कमजोर किया। निवेशक अब अगले सप्ताह होने वाले अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसले को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं।

कारोबार के अंत में एसएंडपी 500 सूचकांक 44.16 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 7,592.20 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 167.15 अंक या 0.64 प्रतिशत नीचे 26,086.19 पर आ गया, जबकि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 313.64 अंक यानी 0.60 प्रतिशत टूटकर 52,067.02 पर बंद हुआ। तीनों प्रमुख सूचकांकों में एक साथ कमजोरी से बाजार में व्यापक दबाव दिखाई दिया।

तेल ने क्यों बढ़ाई चिंता

ब्रेंट क्रूड करीब 6 प्रतिशत उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। अमेरिकी कच्चा तेल भी मई के बाद पहली बार 100 डॉलर के ऊपर चला गया। पश्चिम एशिया में तनाव और तेल आपूर्ति के प्रमुख समुद्री मार्ग को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल परिवहन, विनिर्माण और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत बढ़ा सकता है। इसी कारण बाजार को डर है कि ऊर्जा की महंगाई बाकी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में भी फैल सकती है।

बॉन्ड बाजार से मिला सख्त संकेत

अमेरिका में दस साल की ट्रेजरी यील्ड बुधवार के 4.83 प्रतिशत से बढ़कर करीब 4.91 प्रतिशत हो गई। लंबी अवधि की यील्ड बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होता है और भविष्य की कमाई का मौजूदा मूल्य घटता है। इसका असर खास तौर पर ऊंचे मूल्यांकन वाले तकनीकी शेयरों पर पड़ता है। तीस साल की 22 अरब डॉलर की ट्रेजरी नीलामी में 5.308 प्रतिशत की यील्ड पर मजबूत मांग दिखी, फिर भी व्यापक बॉन्ड बाजार में यील्ड ऊंची बनी रही।

थोक महंगाई ने बदली ब्याज दर की उम्मीद

अगस्त में अमेरिकी उत्पादक मूल्य सूचकांक सालाना आधार पर 5.4 प्रतिशत बढ़ा। यह आंकड़ा बताता है कि उत्पादन स्तर पर कीमतों का दबाव अभी बना हुआ है। तेल की तेजी और थोक महंगाई के मेल ने इस संभावना को बल दिया कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या जरूरत पड़ने पर दोबारा बढ़ा सकता है। बाजार में अगले सप्ताह दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग 70 प्रतिशत तक आंकी गई।

किन शेयरों में हलचल रही

बाजार की कमजोरी के बीच कुछ शेयरों में अलग-अलग कंपनी आधारित गतिविधि दिखी। एप्पल के शेयर करीब 1.1 प्रतिशत चढ़े। दूसरी ओर अमेरिकन ईगल आउटफिटर्स के शेयर 13 प्रतिशत से ज्यादा टूटे, जबकि कूपर कंपनियों में कमजोर तिमाही आय के बाद करीब 14 प्रतिशत की गिरावट आई। ऊर्जा से जुड़ी कंपनियों को तेल की तेजी से अपेक्षाकृत सहारा मिला, लेकिन तकनीकी और उपभोक्ता शेयरों पर दबाव रहा।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या मायने

ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और मजबूत डॉलर उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। शुक्रवार को भारतीय बाजार खुलने पर आईटी, तेल विपणन, विमानन, पेंट और अन्य ऊर्जा-संवेदनशील शेयरों में अधिक उतार-चढ़ाव संभव है। निवेशकों के लिए कच्चे तेल की दिशा, डॉलर सूचकांक, अमेरिकी यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि प्रमुख संकेतक रहेंगे।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट: आगे किन संकेतों पर नजर

वॉल स्ट्रीट में गिरावट का अगला चरण शुक्रवार के ऊर्जा बाजार और आने वाले अमेरिकी आंकड़ों पर निर्भर करेगा। यदि दस साल की यील्ड 4.90 प्रतिशत के ऊपर टिकी रहती है, तो महंगे मूल्यांकन वाले शेयर दबाव में रह सकते हैं। निवेशक किसी एक सत्र की तेजी या गिरावट के बजाय ब्याज दर, कंपनियों की कमाई और तेल की चाल को साथ देखकर फैसला करें।

आगे बाजार का रुख केंद्रीय बैंक की भाषा और पश्चिम एशिया की स्थिति तय करेगी। यदि तेल ऊंचे स्तर पर बना रहता है और महंगाई के आंकड़े नरम नहीं पड़ते, तो शेयर बाजार में अस्थिरता जारी रह सकती है। वहीं तेल में ठहराव या तनाव कम होने के संकेत जोखिम वाली संपत्तियों को राहत दे सकते हैं।

अपडेट: 11 सितम्बर 2026, 04:09 IST