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गांधीनगर में सर्कुलर इकोनॉमी फोरम शुरू, संसाधनों की बर्बादी घटाने पर जोर

पुनः उपयोग योग्य सामग्री और पृथ्वी के साथ सर्कुलर इकोनॉमी का सांकेतिक चित्र

गांधीनगर में विश्व सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का उद्घाटन 15 सितंबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने किया। चार दिन के आयोजन में उत्पादों की उम्र बढ़ाने, सामग्री का दोबारा इस्तेमाल करने और कचरे से उपयोगी संसाधन वापस पाने के तरीकों पर चर्चा हो रही है।

भागीदारी के नए आँकड़े

पर्यावरण मंत्रालय की उद्घाटन संबंधी जानकारी के अनुसार, कार्यक्रम में 62 देशों के 3,600 से अधिक हितधारक भाग ले रहे हैं। प्रदर्शनी में 135 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक व्यावहारिक समाधान दिखा रहे हैं। ये उद्घाटन के समय मंत्रालय द्वारा दिए गए आँकड़े हैं और आयोजन से पहले की अनुमानित भागीदारी से अलग हैं।

पहले दो दिन, 15–16 सितंबर को चार पूर्ण और 16 समानांतर सत्र निर्धारित हैं। रोजगार, वित्त, ऊर्जा, शासन और टिकाऊ उत्पाद जैसे विषय इनके दायरे में हैं। सहयोगी संस्थाओं के 80 अतिरिक्त सत्र 17–18 सितंबर को विभिन्न स्थानों और ऑनलाइन माध्यमों से होने हैं।

मरम्मत और पुनः उपयोग को दैनिक व्यवहार बनाने की अपील

यादव ने कहा कि संसाधनों का बेहतर उपयोग केवल कचरा प्रसंस्करण तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने खरीदारी और घरेलू आदतों में भी मरम्मत तथा दोबारा इस्तेमाल को जगह देने पर जोर दिया। उनके मुताबिक, सहयोग में तकनीक, वित्त और जिम्मेदारी की साझेदारी भी जरूरी है। पटेल ने मंच से ऐसे व्यावहारिक तरीके विकसित करने का आह्वान किया जिन्हें दूसरे स्थानों पर भी अपनाया जा सके।

यादव ने बताया कि अगस्त 2026 तक विभिन्न विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व व्यवस्थाओं में 83,000 से अधिक उत्पादक और 4,802 पुनर्चक्रणकर्ता पंजीकृत थे। उन्होंने लगभग 482.24 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट के प्रसंस्करण का आँकड़ा भी दिया। यह मंत्री द्वारा प्रस्तुत प्रशासनिक जानकारी है।

दो प्रकाशन जारी

उद्घाटन के दौरान उपचारित सीवेज के पुनः उपयोग और भारत की सर्कुलर इकोनॉमी तथा उत्पादक उत्तरदायित्व पहलों से जुड़े दो प्रकाशन जारी किए गए। भारत और फिनलैंड की संस्थाएँ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, सिट्रा और गुजरात की संस्थाएँ आयोजन में सहयोग कर रही हैं।